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ईरान में घुसकर अमेरिकी कर्नल को बचाना था कितना मुश्किल, ये सेना के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि; समझिए

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 05, 2026 11:51 pm IST,  Updated : Apr 05, 2026 11:51 pm IST

US Colonel Rescue Iran Mission: ईरान की सीमा के अंदर से अमेरिकी एयरमैन और कर्नल को सुरक्षित रेस्क्यू करना अमेरिकी सैन्य इतिहास की ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक है। जानें मध्य-पूर्व में जंग के बीच अमेरिका के लिए यह कितनी बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है।

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ईरान में अमेरिकी रेस्क्यू मिशन ऐतिहासिक उपलब्धि! Image Source : AP

US Army Colonel Evacuation: अमेरिकी सेना का ईरान में घुसकर अपने कर्नल को बचाना बड़ी उपलब्धि है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन सैन्य इतिहास के सबसे साहसिक और कठिन मिशनों में से एक है। यह महज एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था, बल्कि एक मॉडर्न वॉर स्ट्रैटेजी, खुफिया नेटवर्क और साहस का असाधारण उदाहरण भी है। दरअसल, यह सैन्य अभियान ईरान में एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान के मार गिराए जाने के बाद शुरू हुआ। जेट के एयरमैन को ईरान से 3 अप्रैल को ही सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन विमान में सवार रहा दूसरा क्रू मेंबर यानी वेपन सिस्टम्स ऑफिसर जो कि एक कर्नल है, ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाके में फंस गया था। वह जख्मी हालत में लगभग 36 से 48 घंटों तक सिर्फ एक पिस्तौल के सहारे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवानों से छिपता रहा। जानें इस ऑपरेशन का सफल होना अमेरिका के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि है।

IRGC की नाक के नीचे से सुरक्षित निकाला अपना कर्नल

अमेरिकी कर्नल जहां फंसा था वह ईरान का दुर्गम और खतरनाक पहाड़ी इलाका था। दुश्मन देश के बॉर्डर के इतने भीतर घुसना और वह भी उस समय जब ईरान की सबसे खूंखार फोर्स IRGC- उसे पकड़ने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हो, एक नामुमकिन सी चुनौती थी। ईरान में IRGC की नाक के नीचे से अपने कर्नल को सुरक्षित निकाल लाना अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज की Technological Superiority, सटीक खुफिया जानकारी और तुरंत फैसला लेने की क्षमता को दिखाता है।

जंग के बीच मिली मनोवैज्ञानिक जीत

यह रेस्क्यू ऑपरेशन अमेरिका के लिए सामरिक दृष्टिकोण से एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है। 1980 के दशक में Operation Eagle Claw के दौरान ईरान में अमेरिकी बंधकों को छुड़ाने की कोशिश बुरी तरह फेल रही थी। 2026 की यह कामयाबी उस ऐतिहासिक नाकामयाबी के दाग को कुछ तो हल्का करती है। यह पूरे विश्व और खासकर अमेरिका के दुश्मनों को एक कड़ा मैसेज है कि अमेरिका अपने सैनिकों को सुरक्षित करने के लिए साहस और क्षमता दोनों रखता है।

'नो मैन लेफ्ट बिहाइंड' की युद्धनीति

इस बचाव अभियान का सबसे बड़ा पहलू ये है कि अमेरिका ने नो मैन लेफ्ट बिहाइंड यानी हम अपने किसी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ेगें की युद्धनीति को अपनाया। उसने इस बात को अपने इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी तरह से चरितार्थ किया। भले ही ईरान में फंसा वह इकलौता सैनिक था लेकिन अमेरिका ने उसे ईरान से निकालने में पूरी ताकत लगा दी। और सफलता पाकर दुनिया को दिखाया कि अमेरिका के लिए एक-एक सैनिक महत्वपूर्ण है।

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