क्या दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई चोक पॉइंट में से एक होर्मुज को बचाने के लिए अब अमेरिका नया सैन्य गठबंधन बनाने जा रहा है? क्या Strait of Hormuz में ईरान की ओर से नाकेबंदी के बीच अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन की तैयारी में जुट गए हैं। खबर है कि अगले सप्ताह लंदन में हाई-लेवल मीटिंग हो सकती है, जिसमें पश्चिमी और मध्य-पूर्व के देशों के रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं। उधर, ट्रंप ने भी ईरान को खुली चेतावनी दी है, जबकि दूसरी तरफ ओमान, ईरान पहुंचकर टेंशन को कम करने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या Hormuz में अब जंग और वार्ता साथ-साथ चलेंगी, या दुनियाभर की तेल सप्लाई एक और बड़े संकट की तरफ बढ़ रही है?
लंदन में हाईलेवल मीटिंग की प्लानिंग
Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम अगले सप्ताह लंदन में एक हाई-लेवल मीटिंग करने की प्लानिंग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य Strait of Hormuz में कमर्शियल शिपिंग की सिक्योरिटी के लिए एक इंटरनेशनल अलायंस बनाना है।
पश्चिम और मिडिल-ईस्ट देशों के रक्षामंत्री करेंगे बात
यूरोपीय राजदूतों और इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का हवाला देते हुए, Axios ने कहा कि इस बैठक में पश्चिमी और मिडिल-ईस्ट के देशों के रक्षामंत्री और सैन्य नेता शामिल हो सकते हैं। खबर है कि इनमें अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन भी पहुंच सकते हैं। हालांकि, कार्यक्रम की तारीख अभी तय नहीं हुई है। इस पर बातचीत चल रही है।
अभी रिएक्शन से बच रहा ब्रिटिश दूतावास
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अफसर ने इस संयुक्त पहल की पुष्टि की, जबकि अमेरिका में ब्रिटिश दूतावास ने इस पर कोई कॉमेंट करने से इनकार कर दिया।
अमेरिका बाकी देशों से क्या चाहता है?
सूत्रों ने बताया कि यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब अमेरिका उन चर्चाओं को आगे बढ़ाने की इच्छा रखता है जो हालिया महीनों में यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने कई देशों के साथ Strait Of Hormuz के लिए एक संभावित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को लेकर की थीं। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश होर्मुज की सुरक्षा के लिए माइंस हटाने वाले जहाज, नौसैनिक जहाज और ड्रोन भेज दें।
क्या टकराव से बाहर निकलना चाहता है अमेरिका
यूरोप के एक राजदूत ने Axios को बताया कि यह प्रयास ईरान के साथ चल रहे टकराव से अमेरिका के बाहर निकलने की स्ट्रैटेजी से जुड़ी है। उन्होंने कहा, "अमेरिका इससे बाहर निकलने का तरीका ढूंढ रहा है और उन्हें हमारी मदद चाहिए।"
इसके उलट ट्रंप कह रहे एक्शन तेज करने की बात
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से हाल में दी गई उस धमकी के बाद हो रहा है जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन तेज करने की बात कही थी। ट्रंप ने वॉर्निंग दी थी कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले कमर्शियल शिप्स पर होने वाले हर एक अटैक के जवाब में अमेरिका, ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को टारगेट करेगा।
जब भी ईरान, Strait of Hormuz में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से अटैक करेगा, तो अमेरिका एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे तबाह कर देगा: डोनाल्ड ट्रंप
ऑपरेशन को तुरंत खत्म करने का इरादा नहीं रखते ट्रंप
इसके अलावा, ट्रंप ने यह इशारा भी किया कि वह इस ऑपरेशन को तुरंत खत्म करने का इरादा नहीं रखते हैं। इसको लेकर ट्रंप कह चुके हैं कि ईरान को अभी ज्यादा चोट नहीं पहुंचाई गई है। बड़ा हमला करना होगा। हमारा काम अभी खत्म नहीं हुआ। हम अभी यहां से नहीं जाने वाले हैं।
होर्मुज बंद होने से क्रूड ऑयल पर बढ़ा प्रेशर
जान लें कि रणनीतिक तौर पर अहम Strait Of Hormuz के आस-पास जारी टेंशन और बढ़ गई है। इसका कारण, ईरान का कमर्शियल शिप्स को टारगेट करना फिर से समुद्र में नाकेबंदी करना है, जिससे विश्व भर में क्रूड ऑयल की सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है। होर्मुज में टेंशन के कारण क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों पर दबाव भी बढ़ गया है।
ईरान-ओमान में बातचीत भी जारी
हालांकि, इस बीच पर्दे के पीछे बातचीत भी चल रही है। Strait Of Hormuz को फिर से खोलने पर वार्ता करने के लिए Oman का एक डेलीगेशन बीते 24 जुलाई को तेहरान पहुंचा। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रहे अटैक्स के बीच, ओमान का एक डेलीगेशन Strait of Hormuz में शिपिंग ट्रैफिक के प्रबंधन के तरीकों पर बातचीत करने के लिए ईरान पहुंचा है।
मैरीटाइम नेविगेशन की सिक्योरिटी पर बात बनाने की कोशिश
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, डेलीगेशन का यह दौरा ओमान और ईरान के बीच चल रही बातचीत का पार्ट है। IRNA ने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ओमान के अपने समकक्ष बद्र अल-बुसैदी से फोन पर बात की है। IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों, मैरीटाइम नेविगेशन की सिक्योरिटी और होर्मुज और फारस की खाड़ी में कमर्शियल शिप की आवाजाही पर चर्चा हुई।
अमेरिका के दबाव में नहीं झुकेगा ईरान
वहीं, प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अब्बास अरागची ने कहा कि शांति ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत ना होने पर नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से लगातार "धमकी और दबाव" पर निर्भर है। ईरान ने दिखा दिया है कि वह अमेरिकी धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है।
(इनपुट- ANI)