4 अगस्त 2026 को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI-2379) में एक बड़ा हादसा टल गया। 137 यात्रियों और 8 क्रू मेंबर्स को ले जा रही यह फ्लाइट हवा में अचानक 300 फीट नीचे गिर गई, जिससे 13 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स गंभीर रूप से घायल हो गए। अब जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि विमान का मुख्य पायलट डोप टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) के सेवन के लिए पॉजिटिव पाया गया।
इस अपडटे के बाद एक फ्लाइट से जुड़े मामले में पायलट के डोप टेस्ट को लेकर सामने आई जानकारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विमान उड़ाने से पहले पायलट की कितनी कड़ी जांच होती है? आइए समझते हैं कि कॉकपिट में कदम रखने से पहले पायलट को किन-किन सख्त जांच प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
प्लेन में चढ़ने से पहले अनिवार्य मेडिकल टेस्ट
DGCA के सख्त नियमों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात पायलट के शरीर में किसी भी तरह के नशे या शराब का स्तर पूरी तरह शून्य (0.00%) होना आवश्यक है। फ्लाइट में जाने से पहले पायलटों को दो सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल जांच से गुजरना होता है:
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ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट: यह टेस्ट शरीर में अल्कोहल (शराब) की मौजूदगी की जांच के लिए किया जाता है। भारत में टेकऑफ से पहले और लैंडिंग के बाद रैंडम आधार पर पायलट और केबिन क्रू का ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट अनिवार्य होता है। इसके लिए, क्रू मेंबर को एक डिजिटल मशीन में जोर से फूंक मारनी होती है। मशीन तुरंत सांस में मौजूद अल्कोहल का स्तर बता देती है। नियम के मुताबिक मशीन में रीडिंग 0.000 ही आनी चाहिए। यदि 0.001 भी रीडिंग आती है, तो उसे उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाती।
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डोप / साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट: यह टेस्ट नशीले और साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच के लिए किया जाता है। DGCA रैंडम आधार पर पायलटों के ब्लड और यूरिन सैंपल्स लेकर गांजा, कोकीन, अफीम और एम्फैटामाइन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों की जांच करता है।
डोप टेस्ट पॉजिटिव आया तो क्या होता है?
DGCA की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाती। नशा या डोप टेस्ट में फेल होने पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पायलट का एविएशन लाइसेंस तुरंत 3 महीने के लिए निलंबित कर दिया जाता है। दूसरी बार फेल होने पर लाइसेंस 3 साल के लिए सस्पेंड होता है। वहीं, यदि कोई पायलट तीसरी बार इस टेस्ट में फेल होता है, तो उसका फ्लाइंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है।
शराब पीने के कितने घंटे बाद उड़ सकता है प्लेन?
कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या शराब पीने के कुछ घंटों बाद पायलट उड़ान भर सकता है? DGCA का स्पष्ट नियम है कि फ्लाइट ड्यूटी शुरू होने से कम से कम 12 घंटे पहले तक शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। 12 घंटे बीतने के बावजूद, यदि ड्यूटी के समय ब्रीथ एनालाइजर में 0.00% से थोड़ा सा भी अल्कोहल ट्रेस होता है, तो पायलट को प्लेन उड़ाने से रोक दिया जाता है।
माउथवॉश या कफ सिरप से पॉजिटिव आ जाए टेस्ट तो क्या होगा?
कुछ माउथवॉश, होम्योपैथिक दवाओं, कफ सिरप, टूथपेस्ट या च्युइंग गम में शराब की हल्की मात्रा होती है। यदि पायलट दावा करता है कि माउथवॉश या दवाई के कारण टेस्ट पॉजिटिव आया है, तो उसे पानी से अच्छी तरह कुल्ला करने के बाद 20 मिनट बाद दूसरा मौका दिया जाता है। यदि दूसरा टेस्ट भी पॉजिटिव रहता है, तो उसे आधिकारिक तौर पर 'फेल' घोषित कर दिया जाता है।
सिर्फ नशा ही नहीं, थकान की भी होती है चिंता
पायलट की सुरक्षा जांच सिर्फ शराब और ड्रग्स तक सीमित नहीं है। थकान भी विमान सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम हो सकती है। लंबे समय तक काम करने या पर्याप्त नींद नहीं मिलने से पायलट की एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स (FDTL) से जुड़े नियम बनाए हैं। इनका मकसद पायलटों को पर्याप्त आराम और नींद का अवसर देना है।
पायलट की मेडिकल फिटनेस भी अहम
पायलट बनने और लाइसेंस बनाए रखने के लिए मेडिकल फिटनेस भी जरूरी होती है। पायलट की आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक फिटनेस जैसी चीजों की जांच निर्धारित मेडिकल मानकों के तहत की जाती है। यानी विमान उड़ाने के लिए सिर्फ उड़ान भरने की तकनीकी जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। पायलट को लगातार मेडिकल और प्रोफेशनल मानकों पर खरा उतरना पड़ता है।
पायलट के लिए नियम इतने सख्त क्यों हैं?
विमान जमीन से हजारों फीट ऊपर उड़ता है और उसमें एक साथ बड़ी संख्या में यात्री मौजूद होते हैं। ऐसे में पायलट की छोटी सी गलती भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसीलिए पायलट के लिए फिटनेस, नशामुक्ति, पर्याप्त आराम और मानसिक सतर्कता बेहद जरूरी है।