Highlights
- अमेरिका और सऊदी अरब ने सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम डील पर साइन किए।
- सऊदी अरब को अब यूरेनियम संवर्धन की क्षमता मिल जाएगी।
- यूरेनियम संवर्धन की क्षमता से सऊदी के लिए परमाणु बम बनाने का रास्ता खुल सकता है।
अमेरिका और सऊदी अरब ने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए समझौता कर लिया है, जिससे सऊदी अरब को अब यूरेनियम संवर्धन की क्षमता मिल जाएगी। लेकिन यही यूरेनियम संवर्धन की क्षमता ईरान के पास होने से अमेरिका को डर है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम की शर्तों का उल्लंघन करके न्यूक्लियर बम बना सकता है। लेकिन अब जब अमेरिका की तरफ से सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति को लेकर डील हुई है तो इसको लेकर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं कि जब यूरेनियम संवर्धन पर अमेरिका की सऊदी अरब को हां है तो ईरान को ना क्यों कर दिया।
ऐतिहासिक परमाणु सहयोग समझौते पर हुए हस्ताक्षर
बता दें कि अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान ने बीते बुधवार को परमाणु सहयोग समझौते पर औपचारिक तौर पर साइन किए, जिसे "123 समझौता" भी कहा जाता है। इसके साथ ही, दोनों ने उस डील पर भी हस्ताक्षर किए जिसे ट्रंप प्रशासन ने "द्विपक्षीय सुरक्षा उपाय समझौता" बताया है। कहा जा रहा है कि यह समझौता करीब 30 साल तक चलेगा और सऊदी अरब के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को डेवलप करने में अमेरिकी कंपनियां शामिल होंगी।
यूरेनियम संवर्धन से खुल सकता है परमाणु हथियार बनाने का रास्ता
परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के एक्सपर्ट का मानना है कि इस डील से सऊदी अरब के लिए न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम शुरू करने का रास्ता भी खुल सकता है। सऊदी अरब के नेता, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले भी संकेत दे चुके हैं कि अगर ईरान, परमाणु बम हासिल कर लेता है, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं।
सऊदी अरब का परमाणु संपन्न पाकिस्तान के साथ भी है रक्षा समझौता
गौरतलब है कि 9 सितंबर, 2025 को इजरायल की तरफ से कतर में हमास के अफसरों को निशाना बनाकर अटैक करने के बाद, सऊदी अरब और न्यूक्लियर हथियार वाले पाकिस्तान ने आपसी रक्षा समझौते पर साइन किए थे। इसके बाद, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने ये भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर उनका देश सऊदी अरब को न्यूक्लियर प्रोग्राम उपलब्ध कराएगा। तब इसे इजरायल के लिए एक वॉर्निंग के रूप में देखा गया, जो मिडिल-ईस्ट का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता है।
अमेरिका में सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन देने पर है हिचकिचाहट
जान लें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सऊदी अरब की यात्रा से कुछ समय पहले क्रिस राइट वहां गए थे और उन्होंने सऊदी अरब में अपने समकक्ष के साथ सऊदी के कमर्शियल न्यूक्लियर पावर इंडस्ट्री को विकसित करने पर चर्चा की थी। उसी के बाद ये समझौता हुआ है। लेकिन कुछ अमेरिकी सांसद सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की क्षमता देने को लेकर हिचकिचा रहे हैं।
ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से क्यों टेंशन में पश्चिमी देश?
हालांकि, यूरेनियम संवर्धन से अपने-आप परमाणु हथियार नहीं बन जाता है। किसी देश को इसके लिए दूसरे कई चरणों में भी महारत हासिल करनी होती है, जैसे कि सिंक्रोनाइज्ड हाई एक्सप्लोसिव्स का प्रयोग। लेकिन यूरेनियम संवर्धन से न्यूक्लियर हथियार बनाने का रास्ता जरूर खुलता है, और इसी बात ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता को बढ़ाई हुई है।
UAE ने बिना यूरेनियम संवर्धन के डेवलप किया न्यूक्लियर पावर प्लांट
जान लें कि सऊदी अरब के पड़ोसी देश, संयुक्त अरब अमीरात में भी 'बराकाह' न्यूक्लियर पावर प्लांट है जो UAE ने साउथ कोरिया की मदद से डेवलप किया है। इसको लेकर, संयुक्त अरब अमीरात ने भी अमेरिका के साथ '123 एग्रीमेंट' पर साइन किए थे। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात ने ऐसा यूरेनियम संवर्धन की क्षमता हासिल करने का प्रयास किए बिना कर लिया। परमाणु अप्रसार के विशेषज्ञ, परमाणु ऊर्जा को चाहने वाले देशों के लिए इसे "गोल्ड स्टैंडर्ड" मानते हैं।
सऊदी अरब के हाथ यूरेनियम संवर्धन से क्या है खतरा?
अमेरिका के थिंक टैंक 'डिफेंस प्रायोरिटीज' में मिडिल ईस्ट मामलों की डायरेक्टर रोजमेरी केलानिक का कहना है, 'यूरेनियम संवर्धन की क्षमता सऊदी अरब को अमेरिका से भविष्य में रियायतें- जैसे नई सुरक्षा गारंटी हासिल करने के लिए एक मजबूत हथियार दे सकती है। सऊदी अरब, इसके लिए अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को परमाणु हथियार बनाने की धमकी दे सकता है।'
डेमोक्रेट सांसद ने लगाया एक कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप
इस बीच, कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सांसद ब्रैड शर्मन ने आशंका जताई कि सऊदी अरब के साथ डील से एक अमेरिकी कंपनी को फायदा हो सकता है।
न्यूक्लियर डील से अमेरिका की बड़ी न्यूक्लियर कंपनी वेस्टिंगहाउस को लाभ होगा, जो उन बड़े लाइट-वॉटर रिएक्टर्स बनाती है, जिनकी जरूरत सऊदी अरब को पड़ने वाली है: डेमोक्रेट सांसद ब्रैड शर्मन
वेस्टिंगहाउस के न्यूक्लियर रिएक्टर्स आएंगे सऊदी अरब के काम
पिछले महीने ही ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि वह वेस्टिंगहाउस की तरफ से डिजाइन किए गए 10 नए बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर्स के डेवलपमेंट में तेजी लाने के लिए 17.5 अरब डॉलर का लोन दे रहा है। बड़े डेटा सेंटर्स से बिजली की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इन रिएक्टर्स को बनाया गया है। सऊदी अरब के साथ डील में भी वेस्टिंगहाउस के AP1000 डिजाइन का इस्तेमाल हो सकता है।
डेमोक्रेट सांसद ने समझाया ईरान और सऊदी डील का अंतर
ब्रैड शर्मन ने आगे कहा कि अमेरिकी फौज ईरान पर इसलिए बमबारी कर रही है क्योंकि वे परमाणु सामग्री को एनरिच और रीप्रोसेस करने पर अड़ गए हैं। अब ऐसा लगता है कि अमेरिका के अधिकारी सऊदी अरब के साथ एक डील कर रहे हैं, जिसमें उन्हें रीप्रोसेसिंग और एनरिचमेंट की मंजूरी दी जा रही है। मुझे इसमें बस यही अंतर नजर आता है कि इस समझौते से वेस्टिंगहाउस को बहुत फायदा होगा, जबकि ईरानी लोग अमेरिकी कंपनियों को यूरेनियम एनरिचमेंट का काम नहीं दे रहे थे। ये भी जान लीजिए कि ईरान ने अपना संवर्धित यूरेनियम कहां छिपाया हो सकता है।
(इनपुट- AP)