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2027 से लागू हो सकता है Bharat NCAP 2.0, देश में बदल जाएगा कार सेफ्टी का पूरा सिस्टम!

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Sep 03, 2026 03:42 pm IST,  Updated : Sep 03, 2026 03:43 pm IST

देश में सड़क सड़क हादसों को कम करने के लिए केंद्र सरकार Bharat NCAP 2.0 लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह नया कार्यक्रम अक्टूबर 2027 से लागू करने की प्लानिंग है।

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देश में लागू होगा Bharat NCAP 2.0 (सांकेतिक फोटो) Image Source : BHARAT NCAP X ACCOUNT

भारत में गाड़ियों की सेफ्टी को लेकर केंद्र सरकार अब बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। SIAM के 66वें वार्षिक सम्मेलन में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि अक्टूबर 2027 से भारत NCAP 2.0 शुरू करने की प्लानिंग है। इस नए सिस्टम के तहत सिर्फ गाड़ी के क्रैश टेस्ट और स्टार रेटिंग पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि उसकी पूरी सुरक्षा व्यवस्था और क्रैश से जुड़ी पूरी सेफ्टी चेन का मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार का मकसद सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों की संख्या को कम करना है।

क्या है Bharat NCAP?

Bharat NCAP यानी भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम एक आधिकारिक स्वतंत्र वाहन सुरक्षा रेटिंग सिस्टम है। इसके तहत पैसेंजर कारों का क्रैश टेस्ट किया जाता है और उनकी सुरक्षा के आधार पर उन्हें 1 से 5 स्टार तक रेटिंग दी जाती है। इस टेस्ट में मुख्य तौर पर यह देखा जाता है कि दुर्घटना के दौरान कार अपने अंदर बैठे वयस्क और बच्चों को कितनी सुरक्षा देती है। आसान भाषा में कहें तो जितनी बेहतर सुरक्षा, उतनी बेहतर स्टार रेटिंग। अब सरकार Bharat NCAP को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है। नए Bharat NCAP 2.0 में सुरक्षा को ज्यादा व्यापक तरीके से देखने की बात कही गई है।

Bharat NCAP 2.0 में क्या बदलेगा?

नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें केवल कार के क्रैश टेस्ट तक सीमित रहने के बजाय पूरी सेफ्टी चेन का मूल्यांकन किया जाएगा। नितिन गडकरी के मुताबिक, अक्टूबर 2027 से इस कार्यक्रम के तहत वाहन की सुरक्षा से जुड़े पूरे वैल्यू चेन को जांचने की दिशा में काम किया जाएगा। इसमें नई टेक्नोलॉजी और भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कार कंपनियों को केवल अच्छी क्रैश टेस्ट रेटिंग हासिल करने पर ही ध्यान नहीं देना होगा, बल्कि वाहन की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।

सड़क हादसों की गंभीर स्थिति

सरकार के इस कदम के पीछे देश में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर स्थिति एक बड़ी वजह है। गडकरी ने बताया कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं और इनमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों में बड़ी संख्या 18 से 36 साल की उम्र के लोगों की है। यह स्थिति देश के लिए बेहद चिंताजनक है, क्योंकि युवा आबादी के बड़ी संख्या में सड़क हादसों का शिकार होने से परिवार और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ता है। गडकरी ने कहा कि किसी भी कीमत पर इन आंकड़ों को कम करने की जरूरत है। इसके लिए सिर्फ वाहन को सुरक्षित बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क, वाहन और चालक से जुड़ी पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर काम करना होगा।

कार कंपनियों के लिए बढ़ेगी जिम्मेदारी

Bharat NCAP 2.0 आने के बाद वाहन निर्माता कंपनियों के लिए सेफ्टी पर ज्यादा निवेश करना जरूरी हो सकता है। कंपनियों को नई सेफ्टी टेक्नोलॉजी, बेहतर इंजीनियरिंग और भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से सुरक्षित वाहन तैयार करने पर ज्यादा जोर देना होगा। भारतीय स्टार्टअप्स की नई तकनीकों को भी इस दिशा में इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इससे देश में ऑटो सेफ्टी से जुड़े इनोवेशन को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा, भारत में वाहन टेस्टिंग का समय और लागत भी वैश्विक स्तर की तुलना में कम बताई गई है। इससे कंपनियों के लिए स्थानीय स्तर पर सेफ्टी टेस्ट करना आसान हो सकता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट

भारत इस समय दुनिया के बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल है। गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट है। देश में कारों की बिक्री और सड़क पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वाहनों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। ज्यादा वाहन होने का मतलब है कि दुर्घटना की स्थिति में सेफ्टी स्टैण्डर्ड का मजबूत होना जरूरी है। सरकार का मानना है कि अच्छी सेफ्टी टेक्नोलॉजी और स्ट्रॉन्ग सेफ्टी स्टैण्डर्ड के जरिए दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिल सकती है।

ड्राइविंग लाइसेंस में आएगा नया पॉइंट सिस्टम

सरकार सिर्फ कारों की सुरक्षा बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। ड्राइवर के व्यवहार में सुधार लाने के लिए भी एक नए सिस्टम पर काम किया जा रहा है।गडकरी ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम लाने की योजना है। इसके तहत ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट काटे जा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति बार-बार नियम तोड़ता है और एक तय सीमा तक उसके पॉइंट कम हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है। यानी आने वाले समय में बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना वाहन चालकों के लिए काफी महंगा पड़ सकता है।

अच्छी ड्राइविंग पर मिलेगा फायदा

इस प्रस्तावित सिस्टम में सिर्फ गलत ड्राइविंग पर कार्रवाई की बात नहीं है। जिम्मेदारी से वाहन चलाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने की भी योजना है। गडकरी के मुताबिक, जिन लोगों का ड्राइविंग रिकॉर्ड अच्छा होगा, उन्हें इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से प्रोत्साहन और अन्य फायदे मिल सकते हैं। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को सिर्फ जुर्माने के डर से नियम मानने के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि सुरक्षित ड्राइविंग की आदत को बढ़ावा देना है।

इनपुट- PTI

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