India TV Fact Check: सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें मायावती राजनीति में सन्यास लेने लेकिन भाजपा का साथ मंजूर न होने की बात कर रही हैं। लेकिन इंडिया टीवी ने जब इस दावे की पड़ताल की तो पता चला कि मायावती का यह वीडियो साल 2020 का है। ये वीडियो उस समय की है जब यूपी की 7 सीटों पर एमएलसी चुनाव होने वाले थे। उस दौरान 29 अक्तूबर 2020 को उन्होंने समाजवादी पार्टी को उसके दलित विरोधी कृत्यों का हवाला देते हुए उसे हराने के लिए भाजपा या किसी अन्य पार्टी को समर्थन देने की बात कही थी। हालांकि इस बयान के बाद मायावती ने दूसरे बयान जारी करते हुए कहा था कि मुस्लिम समाज के लोगों को मैं यह बताना चाहती हूं कि राजनीति से मैं सन्यास ले लूंगी लेकिन भाजपा के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ूंगी।
क्या किया जा रहा है दावा?
एक्स पर एक वेरिफाइड यूजर अरविंद प्रताप (बसपा) ने मायावती के बयान के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, 'मैं मुस्लम समाज को बताना चाहती हूं कि मैं राजनीति से सन्यास ले सकती हूं, लेकिन भाजपा से मिलकर कभी चुनाव नहीं लड़ूंगी और क्या चाहिए हमारे मुस्लिम समाज के लोगों को, क्यों बहक जाते हो उनके कहने पर जो आपका वोट लेकर भाजपा के बेच देते हैं?' वहीं बीएसपी नाम के एक पैरोडी अकाउंट ने भी मायावती के वीडियो को इसी दावे का साथ शेयर किया है। इस यूजर ने लिखा, मैं मुस्लिम समाज को बताना चाहती हूं, की मैं राजनीति से तो सन्यास ले सकती हूं, लेकिन भाजपा के साथ मिलकर कभी चुनाव नहीं लड़ूंगी।
फैक्ट चेक में क्या जानकारी आई सामने
इंडिया टीवी द्वारा जब इस दावे की पड़ताल की गई तो हमने पाया कि यह वीडियो काफी पुराना है। यह वीडियो हमें एबीपी न्यूज के यूट्यूब चैनल पर मिला, जिसे 2 नवंबर 2020 को अपलोड किया गया था। यह वीडियो 25 मिनट लंबा है, जिसके 13 मिनट 21 सेकेंड के बाद मायावती जो बोल रही हैं, उसे वायरल वीडियो में सुना जा सकता है। इस पूरे वीडियो को सुनने के बाद हमने पाया कि मायावती मुख्यत: इस वीडियो में यूपी के एमएलसी चुनावों में भाजपा का समर्थन करने के बयान पर सफाई दे रही हैं।
मायावती पर लगा था भाजपा के समर्थन का आरोप
दरअसल 29 अक्तूबर 2020 को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए मायावती ने उनके मुकाबले में जो भी प्रत्याशी होगा, उसका समर्थन देने की बात कही थी, फिर चाहे वह भाजपा का प्रत्याशी हो या किसी अन्य पार्टी का। इसी मामले पर 2 नवंबर 2020 को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मायावती ने सफाई दी और कहा, 'मैंने सिर्फ भाजपा के समर्थन की बात नहीं कही थी। मेरे बयान को कांग्रेस औरस पा के लोग गलत तरीके से प्रचारित कर रहे हैं, ताकि मुस्लिम समाज के लोग बीएसपी से अलग हो जाएं।'
Fact Check में क्या सामने आया?
फैक्ट चेक में इस बात की पुष्टि हुई है कि मायावती का यह वीडियो पुराना है और इसे फर्जी दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। लोगों को ऐसी किसी भी पोस्ट से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।