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यें है दिल्ली की 11 हांटेड जगह

Written By: India TV News Desk
Published : Aug 07, 2015 08:55 am IST,  Updated : Aug 11, 2015 08:34 am IST
यें है दिल्ली की 11 हांटेड जगह
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यें है दिल्ली की 11 हांटेड जगह
भूली भतियारी का महल, झंडेवालान में यह महल किसी ज़माने में तुगलक वंश का शिकारगाह हुआ करता था। इस महल का नाम
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भूली भतियारी का महल, झंडेवालान में यह महल किसी ज़माने में तुगलक वंश का शिकारगाह हुआ करता था। इस महल का नाम
संजय वन 10 किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। कहा जाता है कि यहां पर अक्सर बच्चें खेलते हुए दिखतें है जो आत्माएं है। इसके साथ ही अन्दर से यह जंगल बहुत घना है। जिसके कारण लोग इसे हांटेड मानते है। यह है दिल्ली का करबला कब्रिस्तान। आपको नाम से ही पता चल
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संजय वन 10 किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। कहा जाता है कि यहां पर अक्सर बच्चें खेलते हुए दिखतें है जो आत्माएं है। इसके साथ ही अन्दर से यह जंगल बहुत घना है। जिसके कारण लोग इसे हांटेड मानते है। यह है दिल्ली का करबला कब्रिस्तान। आपको नाम से ही पता चल
खूनी नदी, रोहिणी कम शोर गुल वाले इस इलाके में बहुत कम लोग आते हैं। लेकिन नदी के आसपास तो कोई नहीं जाता है। क्योंकि नदी के किनारे लाश मिलना एक आम बात है। यह लाशों का कारण हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना चाहे जो हो। इशी लोग इस जगह को हांटेड जगह की शुमार मे
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खूनी नदी, रोहिणी कम शोर गुल वाले इस इलाके में बहुत कम लोग आते हैं। लेकिन नदी के आसपास तो कोई नहीं जाता है। क्योंकि नदी के किनारे लाश मिलना एक आम बात है। यह लाशों का कारण हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना चाहे जो हो। इशी लोग इस जगह को हांटेड जगह की शुमार मे
यह है म्यूटिनी हाउस, कश्मीरी गेट। जहां यह स्मारक 1857 में मारे गए सिपाहियों की याद में अंग्रेजों ने बनवाया था। कहा जाता है कि आझ भी इन सिपाहियों की आत्मा यहा घूमती है जिसके कारण इसे हांटेड जगह माना जाता है।
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यह है म्यूटिनी हाउस, कश्मीरी गेट। जहां यह स्मारक 1857 में मारे गए सिपाहियों की याद में अंग्रेजों ने बनवाया था। कहा जाता है कि आझ भी इन सिपाहियों की आत्मा यहा घूमती है जिसके कारण इसे हांटेड जगह माना जाता है।
दिल्ली के दक्षिण रिज़ के बीहड़ों में छुपा 'मालचा महल' जिसमे पिछले 28 सालों से अवध राजघराने के वंशज राजकुमार 'रियाज़' और राजकुमारी 'सकीना महल' रह रहे है। पहले इनके साथ इनकी माँ 'विलायत महल' भी रहा करती थी जिन्होंने 10 सितंबर 1993 को आत्महत्या कर ली थ
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दिल्ली के दक्षिण रिज़ के बीहड़ों में छुपा 'मालचा महल' जिसमे पिछले 28 सालों से अवध राजघराने के वंशज राजकुमार 'रियाज़' और राजकुमारी 'सकीना महल' रह रहे है। पहले इनके साथ इनकी माँ 'विलायत महल' भी रहा करती थी जिन्होंने 10 सितंबर 1993 को आत्महत्या कर ली थ
यह है दिल्ली का करबला कब्रिस्तान। आपको नाम से ही पता चल रहा होगा कि यह जगह कितनी डरावनी होगी। यहां पर भी एक फिल्मी सीन की तरह लोगों को यहां पर साए और उनकी हरकतें करतें देखा गया है।
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यह है दिल्ली का करबला कब्रिस्तान। आपको नाम से ही पता चल रहा होगा कि यह जगह कितनी डरावनी होगी। यहां पर भी एक फिल्मी सीन की तरह लोगों को यहां पर साए और उनकी हरकतें करतें देखा गया है।
यह है दिल्ली का खूनी दरवाजा जो हांटेड लिस्ट में शामिल है। इसी दरवाजें में अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को मार डाला था। माना जाता है कि अब भी तीनों शहज़ादों की रूह इसी इलाके रहती हैं।
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यह है दिल्ली का खूनी दरवाजा जो हांटेड लिस्ट में शामिल है। इसी दरवाजें में अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को मार डाला था। माना जाता है कि अब भी तीनों शहज़ादों की रूह इसी इलाके रहती हैं।
माली-कमाली का मकबरा और मस्जिद दिल्ली के महरौली में है। यहां पर सोलवहीं शताब्दी के सूफी संत जमाली और कमाली की कब्र मौजूद है। यहां के लोगों का कहना है कि यहां पर जिन्न रहते हैं। सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे। इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमाय
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माली-कमाली का मकबरा और मस्जिद दिल्ली के महरौली में है। यहां पर सोलवहीं शताब्दी के सूफी संत जमाली और कमाली की कब्र मौजूद है। यहां के लोगों का कहना है कि यहां पर जिन्न रहते हैं। सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे। इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमाय
फिरोज शाह कोटला किला को फिरोज शाह तुगलक ने साल 1354 में बनवाया था लेकिन आज रख-रखाव न होने के कारण यह किला खंडहर हो गया है। इस किले के बारे में आसपास के लोगों का कहना है कि हर गुरूवार को मोमबत्तियां और अगरबत्ती जलती दिखती है। साथ हा अगले दिन इस किले क
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फिरोज शाह कोटला किला को फिरोज शाह तुगलक ने साल 1354 में बनवाया था लेकिन आज रख-रखाव न होने के कारण यह किला खंडहर हो गया है। इस किले के बारे में आसपास के लोगों का कहना है कि हर गुरूवार को मोमबत्तियां और अगरबत्ती जलती दिखती है। साथ हा अगले दिन इस किले क
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