Published : Nov 01, 2026 07:39 am IST, Updated : Nov 01, 2026 07:39 am IST
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हिंदू धर्म के ज्यादातर व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोले जाते हैं वहीं कुछ व्रत ऐसे भी हैं जिनमें सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। वहीं, अहोई अष्टमी एकमात्र ऐसा व्रत है जिसमें तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि माताओं द्वारा संतान की रक्षा के लिए रखा जाने वाला अहोई व्रत तारों को अर्घ्य देकर क्यों खोला जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आसमान में चमकने वाले अनगिनत तारों को चिरंजीवी और दिव्य माना जाता है। जिस तरह तारे आसमान में स्थिर रहते हैं और हमेशा जगमगाते रहते हैं, उसी तरह माताएं अपनी संतान के लिए स्थिरता और दीर्घायु की कामना करती हैं। यही वजह है कि अहोई अष्टमी का व्रत तारों को अर्घ्य देकर खोला जाता है।
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अहोई अष्टमी के दिन माताएं निर्जला व्रत रखी हैं और साथ ही बच्चों की देखभाल भी करती हैं। वहीं इस दिन अष्टमी तिथि होने के चलते चंद्रमा भी बहुत देरी से उदय होता है, इसलिए व्यावहारिक दृष्टि से भी इस दिन तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलना सही माना जाता है।
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अहोई अष्टमी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा (साहूकार, उसकी सात बहुएं और स्याहू की कथा) में कहीं भी। चंद्रमा को अर्घ्य देने का जिक्र नहीं मिलता इसलिए तारों को अर्घ्य देकर ही प्राचीन समय से यह व्रत खोला जा रहा है।