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अहोई अष्टमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं? यहां जानें

अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखने से संतान की आयु लंबी होती है और उनका जीवन सुखमय बना रहता है। तो यहां जानिए कि अहोई अष्टमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

Written By: Vineeta Mandal
Published : Oct 31, 2026 11:14 pm IST,  Updated : Oct 31, 2026 11:14 pm IST
1 नवंबर 2026, रविवार को माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन यह व्रत किया जाता है। इस व्रत में महिलाएं पूरा निर्जला उपवास रखती हैं और शाम के समय तारों को देखने के बाद व्रत का पारण करती हैं। कई जगह महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद अहोई अष्टमी का व्रत खोलती हैं। तो आइए जानते हैं कि अहोई अष्टमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
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1 नवंबर 2026, रविवार को माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन यह व्रत किया जाता है। इस व्रत में महिलाएं पूरा निर्जला उपवास रखती हैं और शाम के समय तारों को देखने के बाद व्रत का पारण करती हैं। कई जगह महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद अहोई अष्टमी का व्रत खोलती हैं। तो आइए जानते हैं कि अहोई अष्टमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संतान की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि का संकल्प (निर्जला व्रत) लें। उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर अहोई माता और साही (स्याहू) के चित्र का पूजन करें।
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सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संतान की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि का संकल्प (निर्जला व्रत) लें। उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर अहोई माता और साही (स्याहू) के चित्र का पूजन करें।
अहोई अष्टमी के दिन शाम के समय प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करें और व्रत कथा सुनें।
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अहोई अष्टमी के दिन शाम के समय प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करें और व्रत कथा सुनें।
शाम को आसमान में तारे या चंद्रमा को देखने के बाद अर्घ्य देकर ही जल ग्रहण करें।
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शाम को आसमान में तारे या चंद्रमा को देखने के बाद अर्घ्य देकर ही जल ग्रहण करें।
व्रत के बाद तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन न करें। पारण के बाद सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
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व्रत के बाद तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन न करें। पारण के बाद सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
इस दिन सुई-धागे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए, सिलाई-कढ़ाई वर्जित मानी जाती है।
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इस दिन सुई-धागे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए, सिलाई-कढ़ाई वर्जित मानी जाती है।
अहोई अष्टमी के दिन चाकू या किसी नुकीली चीज से फल-सब्जियां काटने से बचना चाहिए।
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अहोई अष्टमी के दिन चाकू या किसी नुकीली चीज से फल-सब्जियां काटने से बचना चाहिए।
अहोई अष्टमी के दिन गुस्से और वाद-विवाद से दूर रहें और बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें।
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अहोई अष्टमी के दिन गुस्से और वाद-विवाद से दूर रहें और बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें।
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