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सच्चे हनुमान भक्तों पर न्याय के देवता क्यों रहते हैं मेहरबान, कम हो जाता है शनि का कठोर प्रभाव

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : May 13, 2026 10:53 pm IST,  Updated : May 13, 2026 10:54 pm IST
शनिवार का दिन आते ही हनुमान मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। कोई हनुमान चालीसा का पाठ करता है, तो व्रत रखकर कोई जीवन की परेशानियों से राहत पाने के लिए बजरंगबली की शरण में जाता है। कहते हैं कि इससे शनि का कठोर प्रभाव कम हो जाता है। चलिए जानते हैं क्यों सच्चे हनुमान भक्तों को शनि देव कम कष्ट देते हैं।
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शनिवार का दिन आते ही हनुमान मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। कोई हनुमान चालीसा का पाठ करता है, तो व्रत रखकर कोई जीवन की परेशानियों से राहत पाने के लिए बजरंगबली की शरण में जाता है। कहते हैं कि इससे शनि का कठोर प्रभाव कम हो जाता है। चलिए जानते हैं क्यों सच्चे हनुमान भक्तों को शनि देव कम कष्ट देते हैं।
हिंदू मान्यताओं में हनुमान जी को केवल शक्ति का देवता ही नहीं, बल्कि संकटमोचक और रक्षक भी माना गया है। यही कारण है कि जब जीवन में शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव बढ़ता है, तो लोग हनुमान जी की पूजा को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार एक समय शनि देव को अपने अत्यधिक बल और प्रभाव पर अहंकार हो गया था। उन्हें लगता था कि उनके प्रभाव से कोई भी व्यक्ति या ग्रह नहीं बच सकता।
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हिंदू मान्यताओं में हनुमान जी को केवल शक्ति का देवता ही नहीं, बल्कि संकटमोचक और रक्षक भी माना गया है। यही कारण है कि जब जीवन में शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव बढ़ता है, तो लोग हनुमान जी की पूजा को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार एक समय शनि देव को अपने अत्यधिक बल और प्रभाव पर अहंकार हो गया था। उन्हें लगता था कि उनके प्रभाव से कोई भी व्यक्ति या ग्रह नहीं बच सकता।
शनि देव का अहंकार: इसी गर्व में वे लंका पहुंचे, जहां उस समय रावण का शासन था। रावण स्वयं भी अत्यंत शक्तिशाली और घमंडी राजा माना जाता था। कहा जाता है कि शनि देव ने वहां अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश की, लेकिन रावण ने उनका अपमान कर दिया और उन्हें बंदी बनाकर उल्टा लटका दिया।
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शनि देव का अहंकार: इसी गर्व में वे लंका पहुंचे, जहां उस समय रावण का शासन था। रावण स्वयं भी अत्यंत शक्तिशाली और घमंडी राजा माना जाता था। कहा जाता है कि शनि देव ने वहां अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश की, लेकिन रावण ने उनका अपमान कर दिया और उन्हें बंदी बनाकर उल्टा लटका दिया।
शनि देव का कष्ट: रावण की कैद में शनि देव लंबे समय तक कष्ट सहते रहे। यह प्रसंग इस बात का संकेत माना जाता है कि अहंकार चाहे किसी का भी हो, उसका परिणाम हमेशा दुख ही होता है। अपनी शक्तियों पर गर्व करने वाले शनि देव भी वहां असहाय हो गए और पीड़ा सहते रहे।
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शनि देव का कष्ट: रावण की कैद में शनि देव लंबे समय तक कष्ट सहते रहे। यह प्रसंग इस बात का संकेत माना जाता है कि अहंकार चाहे किसी का भी हो, उसका परिणाम हमेशा दुख ही होता है। अपनी शक्तियों पर गर्व करने वाले शनि देव भी वहां असहाय हो गए और पीड़ा सहते रहे।
हनुमान जी का आगमन: इसी दौरान जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने शनि देव को बंदी अवस्था में देखा। हनुमान जी ने तुरंत उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराया। हनुमान जी की करुणा और शक्ति ने उस क्षण शनि देव को भी प्रभावित किया।
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हनुमान जी का आगमन: इसी दौरान जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने शनि देव को बंदी अवस्था में देखा। हनुमान जी ने तुरंत उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराया। हनुमान जी की करुणा और शक्ति ने उस क्षण शनि देव को भी प्रभावित किया।
अहंकार का अंत: मुक्त होने के बाद शनि देव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें समझ आया कि सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, बल्कि विनम्रता और सेवा भाव में होती है। हनुमान जी की महानता के सामने उनका गर्व समाप्त हो गया और वे उनके प्रति कृतज्ञ हो गए।
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अहंकार का अंत: मुक्त होने के बाद शनि देव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें समझ आया कि सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, बल्कि विनम्रता और सेवा भाव में होती है। हनुमान जी की महानता के सामने उनका गर्व समाप्त हो गया और वे उनके प्रति कृतज्ञ हो गए।
हनुमान भक्ति और शनि कृपा: कथा के अनुसार शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया कि जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करेगा, उस पर उनका कठोर प्रभाव कम हो जाएगा। इसी कारण शनिवार को हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ और तेल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से मानसिक भय, नकारात्मकता और शनि दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
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हनुमान भक्ति और शनि कृपा: कथा के अनुसार शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया कि जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करेगा, उस पर उनका कठोर प्रभाव कम हो जाएगा। इसी कारण शनिवार को हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ और तेल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से मानसिक भय, नकारात्मकता और शनि दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
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