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Jyotish Gyan: ग्रहों के राजा होते हुए भी सूर्य की महादशा सबसे कम वर्षों की क्यों होती है? जानें कारण

Written By: Naveen Khantwal
Published : Jun 18, 2026 04:22 pm IST,  Updated : Jun 18, 2026 04:22 pm IST
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है लेकिन सभी 9 ग्रहों में सबसे कम अवधि की महादशा सूर्य की ही होती है। आपको बता दें कि सूर्य की महादशा केवल 6 वर्षों की होती है। इसकी वजह क्या है इसके बारे में आइए 4 महत्वपूर्ण बातों से जानते हैं।
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वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है लेकिन सभी 9 ग्रहों में सबसे कम अवधि की महादशा सूर्य की ही होती है। आपको बता दें कि सूर्य की महादशा केवल 6 वर्षों की होती है। इसकी वजह क्या है इसके बारे में आइए 4 महत्वपूर्ण बातों से जानते हैं।
1. सूर्य को ज्योतिष में आत्मा, प्रकाश, अधिकार का कारक माना जाता है। इनकी महादशा केवल 6 वर्ष की हो होती है। इसका कारण है सूर्य का केंद्रित प्रभाव सूर्य बेहद कम समय में ही व्यक्ति के जीवन पर स्पष्ट और तेज प्रभाव डालते हैं इसलिए इनकी महादशा केवल 6 वर्षों की होती है। तीव्रता के लिहाज से सूर्य के बाद मंगल हैं और मंगल की महादशा भी केवल 7 वर्षों की होती है। सूर्य, मगंल और केतु को छोड़ दें तो बाकी के सभी ग्रहों की दशा 10 या उससे अधिक वर्ष की ही होती है।
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1. सूर्य को ज्योतिष में आत्मा, प्रकाश, अधिकार का कारक माना जाता है। इनकी महादशा केवल 6 वर्ष की हो होती है। इसका कारण है सूर्य का केंद्रित प्रभाव सूर्य बेहद कम समय में ही व्यक्ति के जीवन पर स्पष्ट और तेज प्रभाव डालते हैं इसलिए इनकी महादशा केवल 6 वर्षों की होती है। तीव्रता के लिहाज से सूर्य के बाद मंगल हैं और मंगल की महादशा भी केवल 7 वर्षों की होती है। सूर्य, मगंल और केतु को छोड़ दें तो बाकी के सभी ग्रहों की दशा 10 या उससे अधिक वर्ष की ही होती है।
2. सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है और राजा का कार्य है शासन करना। जिस तरह राजा केवल आदेश देता है और उसके अधीन कार्य करने वाले लोग आदेशों का पालन करते हैं और समाज में अनुशासन लाते हैं। वैसे ही सूर्य 6 वर्षों की कम अवधि में ही व्यक्ति को अनुशासन, स्पष्टता और नेतृत्व करने की क्षमता सिखाता है। इसके लिए सूर्य की महादशा का लंबा होना आवश्यक नहीं है।
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2. सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है और राजा का कार्य है शासन करना। जिस तरह राजा केवल आदेश देता है और उसके अधीन कार्य करने वाले लोग आदेशों का पालन करते हैं और समाज में अनुशासन लाते हैं। वैसे ही सूर्य 6 वर्षों की कम अवधि में ही व्यक्ति को अनुशासन, स्पष्टता और नेतृत्व करने की क्षमता सिखाता है। इसके लिए सूर्य की महादशा का लंबा होना आवश्यक नहीं है।
3. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो सूर्य सभी ग्रहों में सबसे तेजस्वी और ऊर्जावान है। सूर्य, शक्तिशाली ऊर्जा पूरे ब्रह्मांड में प्रसारित करता है इसलिए व्यक्ति के जीवन पर भी पूर्ण तीव्रता से उनका असर महादशा के दौरान पड़ता है और कम अवधि की महादशा होने के बावजूद व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव आ सकते हैं। जिन ग्रहो की दशा लंबी चलती है उनका व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव धीमा रहता है।
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3. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो सूर्य सभी ग्रहों में सबसे तेजस्वी और ऊर्जावान है। सूर्य, शक्तिशाली ऊर्जा पूरे ब्रह्मांड में प्रसारित करता है इसलिए व्यक्ति के जीवन पर भी पूर्ण तीव्रता से उनका असर महादशा के दौरान पड़ता है और कम अवधि की महादशा होने के बावजूद व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव आ सकते हैं। जिन ग्रहो की दशा लंबी चलती है उनका व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव धीमा रहता है।
4. सूर्य की महादशा व्यक्ति को जिम्मेदारियों का बोध करवाती है, व्यक्ति का उद्देश्य स्पष्ट करती है और आत्मिक रूप से व्यक्ति को प्रबल बनाती है। इसलिए सूर्य की महादशा कम अवधि की होने के बावजूद भी बेहद प्रभावशाली रहती है।
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4. सूर्य की महादशा व्यक्ति को जिम्मेदारियों का बोध करवाती है, व्यक्ति का उद्देश्य स्पष्ट करती है और आत्मिक रूप से व्यक्ति को प्रबल बनाती है। इसलिए सूर्य की महादशा कम अवधि की होने के बावजूद भी बेहद प्रभावशाली रहती है।
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