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पाली नगर निगम में जीतकर भी हार सकती है कांग्रेस, निर्दलीय पलट सकते हैं पूरा खेल, समझिए समीकरण

 Written By: India TV News Desk
 Published : Sep 14, 2026 12:19 pm IST,  Updated : Sep 14, 2026 12:28 pm IST

पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से चार सीट दूर है। 15 निर्दलीय पार्षद सत्ता का समीकरण बदल सकते हैं और बीजेपी के साथ जाकर बाजी पलट सकते हैं।

Congress- India TV Hindi
कांग्रेस। Image Source : कॉन्सेप्ट इमेज PTI

पाली नगर निगम चुनाव के 65 वार्डों के नतीजे सामने आ चुके हैं और तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी ने 21 वार्डों में जीत दर्ज की है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने 15 सीटों पर कब्जा जमाकर पूरे चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। आंकड़ों के लिहाज से कांग्रेस भले ही सबसे आगे हो, लेकिन नगर निगम की सत्ता तक पहुंचने के लिए उसे अभी निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि चुनाव जीतने के बाद भी कांग्रेस के लिए बोर्ड बनाना आसान नजर नहीं आ रहा है।

15 निर्दलीय तय करेंगे पाली की सत्ता

पाली नगर निगम में बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा। कांग्रेस के पास फिलहाल 29 सीटें हैं, यानी बहुमत के आंकड़े से वह चार कदम दूर है। दूसरी तरफ बीजेपी 21 सीटों पर जीत के साथ कांग्रेस से पीछे है, लेकिन उसके पास निर्दलीयों को अपने साथ जोड़कर सत्ता का गणित बदलने का मौका मौजूद है। 15 निर्दलीय पार्षद अब इस पूरे सियासी खेल में सबसे अहम भूमिका में आ गए हैं। यही कारण है कि नतीजे आने के बाद सबसे ज्यादा नजर निर्दलीय पार्षदों के अगले कदम पर रहेगी। अगर इनमें से चार या उससे ज्यादा पार्षद कांग्रेस के साथ आते हैं, तो कांग्रेस बहुमत के करीब या बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती है। लेकिन अगर निर्दलीयों का बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ चला जाता है तो कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसके हाथ से नगर निगम की सत्ता निकल सकती है।

बीजेपी के बागी अब बन सकते हैं किंगमेकर

इस चुनाव में कई ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे, जो बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत कर चुनाव लड़े। अब इनमें से कुछ उम्मीदवारों की जीत बीजेपी के लिए उम्मीद की वजह बन सकती है। चुनाव परिणाम के बाद इन पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए दोनों दलों के बीच राजनीतिक सक्रियता बढ़ने की संभावना है। हालांकि इन निर्दलीयों का अंतिम रुख क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है। वे कांग्रेस या बीजेपी में से किसी एक को समर्थन दे सकते हैं या फिर अपनी शर्तों के साथ बोर्ड गठन में भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में 15 निर्दलीय पार्षदों का फैसला पाली नगर निगम की अगली सरकार तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।

महिला महापौर की कुर्सी पर भी सबकी नजर

पाली नगर निगम को इस बार महिला महापौर मिलने वाली है। ऐसे में बोर्ड गठन के साथ महापौर पद को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज होने की उम्मीद है। बीजेपी की ओर से वार्ड 33 की नमिता बुबकिया, वार्ड 23 की खुशबू लोढ़ा और वार्ड 1 की शारदा बोहरा के नाम चर्चा में हैं। कांग्रेस खेमे से वार्ड 38 की राजबाला हिंगड, वार्ड 34 की सुमित्रा जैन और वार्ड 11 की लीला चौधरी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। फिलहाल कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन असली फैसला निर्दलीयों के रुख से होगा। ऐसे में पाली में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सबसे ज्यादा सीटें किसने जीतीं, बल्कि यह है कि 15 निर्दलीय किसके साथ खड़े होते हैं। यही फैसला तय करेगा कि नगर निगम की कमान कांग्रेस के हाथ जाती है या बीजेपी बाजी पलटने में कामयाब होती है।

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