क्या सिंगल लोग भी कर सकते हैं करवा चौथ का व्रत? जानिए क्या हैं इनके लिए नियम
क्या सिंगल लोग भी कर सकते हैं करवा चौथ का व्रत? जानिए क्या हैं इनके लिए नियम
भारतीय हिंदू महिलाएं शादी के बाद अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस दिन निर्जला व्रत रहकर रात में चंद्रमा की पूजा के बाद पति का चेहरा देखने की विधान है। ऐसा मान्यता है कि यह व्रत करने से महिलाओं को अपनी अंतिम सांस तक सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है।
Published : Oct 07, 2025 12:57 pm IST, Updated : Oct 07, 2025 12:57 pm IST
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भारतीय हिंदू महिलाएं शादी के बाद अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस दिन निर्जला व्रत रहकर रात में चंद्रमा की पूजा के बाद पति का चेहरा देखने की विधान है। ऐसा मान्यता है कि यह व्रत करने से महिलाओं को अपनी अंतिम सांस तक सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता हैं कि क्या अनमैरिड लड़कियां भी ये व्रत रख सकती हैं? चलिए जानते हैं इस सवाल का जवाब
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करवा चौथ का व्रत सौभाग्यवती स्त्रियां रखती हैं, लेकिन अब कई अविवाहिता युवतियां भी अपने होने वाले पति या प्रेमी के लिए यह व्रत करने लगी हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी लड़कियां करवा चौथ की व्रत तो रख सकती हैं, लेकिन उनके लिए नियम थोड़े अलग होते हैं।
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मान्यता है कि अगर कुंवारी कन्याएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं, तो उसे अच्छा जीवनसाथी मिलता है और जल्दी विवाह के योग बनते हैं। उन्हें करवा माता से सुयोग्य वर की कामना करके होने वाले पति के लिए आरोग्य का आशीर्वाद मांगना चाहिए। करवा चौथ का व्रत इस साल 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा।
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ये व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें अन्न-जल दोनों ही ग्रहण नहीं करना होता है। सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन कुंवारी कन्याओं के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है। उन्हें फलाहार पर रहना चाहिए।
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दरअसल, कुंवारी लड़कियों के लिए सरगी और बायना का नियम नहीं है, इसलिए निर्जला व्रत नहीं कर सकते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का निर्जला व्रत विवाह के बाद शुरू होना चाहिए।
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कुंवारी लड़कियों को 16 शृंगार भी नहीं करना चाहिए। हालांकि, इस दिन पारंपरिक कपड़े पहनकर अच्छे से तैयार होने की कोई मनाही नहीं है। कुंवारी लड़कियों को सुहाग की चीजें नहीं देनी चाहिए, क्योंकि न तो इन्हें सरगी मिलती और न बायना निकाला जाता है।
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नियम कहता है कि अगर अविवाहित युवती करवा चौथ का व्रत रखती है, तो उसे चंद्रमा को अर्घ्य देने की जरूरत नहीं है। वह तारों को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण कर सकती है। वो भगवान शिव और मां पार्वती का पूजा में शामिल हो सकती हैं, लेकिन पूजन कर नहीं सकती।
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करवा चौथ का व्रत कर रही अविवाहित युवतियों के लिए पूजा की थाल घुमाने और करवा बदलने की रस्म नहीं है। यह रस्म केवल शादीशुदा महिलाओं के लिए ही होती है।