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घर में कबूतरों का डेरा है खतरे की घंटी! किस दिशा में कबूतर का आना अशुभ, वास्तु के मुताबिक जानें इसका उपाय

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Oct 27, 2025 06:14 pm IST,  Updated : Oct 27, 2025 06:14 pm IST
वास्तुशास्त्र में घर की हर दिशा का एक खास महत्व माना गया है, क्योंकि हर कोना अपनी विशिष्ट ऊर्जा का स्रोत होता है। अक्सर देखा जाता है कि घर की बालकनी या किसी खास दिशा में बार-बार कबूतर आकर गंदगी कर जाते हैं। कई लोग इसे मामूली बात मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन वास्तु की दृष्टि से यह घर की ऊर्जा में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
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वास्तुशास्त्र में घर की हर दिशा का एक खास महत्व माना गया है, क्योंकि हर कोना अपनी विशिष्ट ऊर्जा का स्रोत होता है। अक्सर देखा जाता है कि घर की बालकनी या किसी खास दिशा में बार-बार कबूतर आकर गंदगी कर जाते हैं। कई लोग इसे मामूली बात मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन वास्तु की दृष्टि से यह घर की ऊर्जा में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
खासतौर पर अगर यह स्थिति उत्तर-पश्चिम दिशा में हो रही है, तो यह आर्थिक हानि, रिश्तों में तनाव और मानसिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं वास्तु विशेषज्ञ से कि कबूतरों की उपस्थिति इस दिशा में क्यों अशुभ मानी जाती है और इससे बचने के आसान उपाय क्या हैं।
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खासतौर पर अगर यह स्थिति उत्तर-पश्चिम दिशा में हो रही है, तो यह आर्थिक हानि, रिश्तों में तनाव और मानसिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं वास्तु विशेषज्ञ से कि कबूतरों की उपस्थिति इस दिशा में क्यों अशुभ मानी जाती है और इससे बचने के आसान उपाय क्या हैं।
वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) बहुत संवेदनशील मानी जाती है। वायु तत्व से जुड़ी इस दिशा का संबंध मानसिक स्थिरता, रिश्तों के सामंजस्य और विचारों की स्पष्टता से होता है। जब यह दिशा संतुलित होती है, तो घर में मेलजोल, समझदारी और शांति बनी रहती है, लेकिन जब इस दिशा की ऊर्जा असंतुलित हो जाती है, तो परिवार के सदस्यों के विचारों और व्यवहार पर इसका नकारात्मक असर होता है।
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वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) बहुत संवेदनशील मानी जाती है। वायु तत्व से जुड़ी इस दिशा का संबंध मानसिक स्थिरता, रिश्तों के सामंजस्य और विचारों की स्पष्टता से होता है। जब यह दिशा संतुलित होती है, तो घर में मेलजोल, समझदारी और शांति बनी रहती है, लेकिन जब इस दिशा की ऊर्जा असंतुलित हो जाती है, तो परिवार के सदस्यों के विचारों और व्यवहार पर इसका नकारात्मक असर होता है।
अक्सर घरों की इस दिशा में कबूतर बार-बार आते हैं या वहां घोंसला बना लेते हैं। ऐसे में उनकी बीट दीवारों या बालकनी में जमा हो जाती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, यह केवल सफाई की समस्या नहीं, बल्कि 'ऊर्जा संकेत' है कि उस कोने में सकारात्मक प्रवाह बाधित हो गया है। जब ऊर्जा रुकती है, तो वहां नकारात्मकता बढ़ने लगते हैं, जिससे घर के लोगों में चिड़चिड़ापन, मानसिक बेचैनी जगह लेने लगती है।
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अक्सर घरों की इस दिशा में कबूतर बार-बार आते हैं या वहां घोंसला बना लेते हैं। ऐसे में उनकी बीट दीवारों या बालकनी में जमा हो जाती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, यह केवल सफाई की समस्या नहीं, बल्कि 'ऊर्जा संकेत' है कि उस कोने में सकारात्मक प्रवाह बाधित हो गया है। जब ऊर्जा रुकती है, तो वहां नकारात्मकता बढ़ने लगते हैं, जिससे घर के लोगों में चिड़चिड़ापन, मानसिक बेचैनी जगह लेने लगती है।
ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं कि उत्तर-पश्चिम दिशा का कबूतरों से गंदा होना इस बात का संकेत है कि घर में हवा का प्रवाह या मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे में घर के सदस्यों को अनावश्यक खर्च या आर्थिक असंतुलन का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए इस दिशा को साफ रखना बहुत जरूरी हो जाता है।
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ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं कि उत्तर-पश्चिम दिशा का कबूतरों से गंदा होना इस बात का संकेत है कि घर में हवा का प्रवाह या मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे में घर के सदस्यों को अनावश्यक खर्च या आर्थिक असंतुलन का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए इस दिशा को साफ रखना बहुत जरूरी हो जाता है।
उत्तर-पश्चिम दिशा में हवा का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे, इसके लिए उसे खुला और हवादार रखें। पॉजिटिविटी के लिए वहां स्टील की 6 रॉड वाली पवन घंटी भी लगा सकते हैं। हर सुबह कपूर या गंगा जल से उस स्थान पर छिड़काव करें, ताकि नेगेटिविटी दूर रहे।
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उत्तर-पश्चिम दिशा में हवा का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे, इसके लिए उसे खुला और हवादार रखें। पॉजिटिविटी के लिए वहां स्टील की 6 रॉड वाली पवन घंटी भी लगा सकते हैं। हर सुबह कपूर या गंगा जल से उस स्थान पर छिड़काव करें, ताकि नेगेटिविटी दूर रहे।
वास्तु के अनुसार इस दिशा में हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम या आसमानी का उपयोग शुभ होता है, जबकि गहरे रंग ऊर्जा को रोकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि इस कोने में शांति और आभार की भावना बनाए रखें, क्योंकि यही स्थान रिश्तों और मानसिक संतुलन को स्थिर करता है।
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वास्तु के अनुसार इस दिशा में हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम या आसमानी का उपयोग शुभ होता है, जबकि गहरे रंग ऊर्जा को रोकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि इस कोने में शांति और आभार की भावना बनाए रखें, क्योंकि यही स्थान रिश्तों और मानसिक संतुलन को स्थिर करता है।
इस दोष से बचने के लिए सबसे पहले उस जगह की सफाई करें और कबूतरों को आने से रोकने के लिए जाली लगाएं। यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।
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इस दोष से बचने के लिए सबसे पहले उस जगह की सफाई करें और कबूतरों को आने से रोकने के लिए जाली लगाएं। यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।
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