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तस्वीरों में देखें हमेशा बर्फ से ढका रहने वाला ज्वालामुखी, जानें खास बातें

Published : Jul 27, 2025 02:34 pm IST,  Updated : Jul 27, 2025 02:34 pm IST
दुनिया में ज्वालामुखियों की छवि आमतौर पर गर्म, धधकती लावे और धुएं से निकलती है, लेकिन एक ज्वालामुखी ऐसा भी है जो हमेशा बर्फ से ढका रहता है। यह ज्वालामुखी है माउंट एरबस जो अंटार्कटिका महाद्वीप में स्थित है और दुनिया के सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
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दुनिया में ज्वालामुखियों की छवि आमतौर पर गर्म, धधकती लावे और धुएं से निकलती है, लेकिन एक ज्वालामुखी ऐसा भी है जो हमेशा बर्फ से ढका रहता है। यह ज्वालामुखी है माउंट एरबस जो अंटार्कटिका महाद्वीप में स्थित है और दुनिया के सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है।
माउंट एरबस ज्वालामुखी अंटार्कटिका के रॉस द्वीप पर स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग 3,794 मीटर (12,448 फीट) है। यह दुनिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है जिसकी चोटी पर स्थायी लावा झील मौजूद है और इसके बावजूद यह साल भर बर्फ से ढका रहता है।
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माउंट एरबस ज्वालामुखी अंटार्कटिका के रॉस द्वीप पर स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग 3,794 मीटर (12,448 फीट) है। यह दुनिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है जिसकी चोटी पर स्थायी लावा झील मौजूद है और इसके बावजूद यह साल भर बर्फ से ढका रहता है।
माउंट एरबस अंटार्कटिका के बेहद ठंडे और बर्फीले इलाके में स्थित है, जहां तापमान अक्सर -50°C तक गिर जाता है। यहां की वर्षभर की बर्फबारी और ग्लेशियर जैसी परिस्थितियों के कारण ज्वालामुखी की बाहरी सतह हमेशा बर्फ से ढकी रहती है। माउंट एरबस के अंदर गर्म लावा सक्रिय रहता है।
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माउंट एरबस अंटार्कटिका के बेहद ठंडे और बर्फीले इलाके में स्थित है, जहां तापमान अक्सर -50°C तक गिर जाता है। यहां की वर्षभर की बर्फबारी और ग्लेशियर जैसी परिस्थितियों के कारण ज्वालामुखी की बाहरी सतह हमेशा बर्फ से ढकी रहती है। माउंट एरबस के अंदर गर्म लावा सक्रिय रहता है।
माउंट एरबस दुनिया के गिने-चुने ज्वालामुखियों में से एक है, जहां वर्षों से एक स्थायी लावा झील बनी हुई है। यह वैज्ञानिकों के लिए बहुत बड़ा अध्ययन क्षेत्र है। माउंट एरबस से ऐसे गैस बुलबुले और जमी हुई लावा की चट्टानें निकलती हैं, जो वैज्ञानिक शोध के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
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माउंट एरबस दुनिया के गिने-चुने ज्वालामुखियों में से एक है, जहां वर्षों से एक स्थायी लावा झील बनी हुई है। यह वैज्ञानिकों के लिए बहुत बड़ा अध्ययन क्षेत्र है। माउंट एरबस से ऐसे गैस बुलबुले और जमी हुई लावा की चट्टानें निकलती हैं, जो वैज्ञानिक शोध के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
माउंट एरबस पर वैज्ञानिक समय-समय पर अभियान चलाते हैं ताकि वो यह जान सकें कि ज्वालामुखीय गतिविधियां पृथ्वी के अंदरूनी भागों के बारे में क्या जानकारी देती हैं। इसके अलावा यह स्थान मंगल और अन्य ग्रहों पर संभावित जीवन के अध्ययन के लिए मॉडल के रूप में भी काम करता है।
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माउंट एरबस पर वैज्ञानिक समय-समय पर अभियान चलाते हैं ताकि वो यह जान सकें कि ज्वालामुखीय गतिविधियां पृथ्वी के अंदरूनी भागों के बारे में क्या जानकारी देती हैं। इसके अलावा यह स्थान मंगल और अन्य ग्रहों पर संभावित जीवन के अध्ययन के लिए मॉडल के रूप में भी काम करता है।
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