नई दिल्ली: एक RTI ने खुलासा किया है कि 2013 में बाढ़ त्रासदी के दौरान फर्जी बिल से सरकारी पैसे की लूट हुई है। जून 2013 में उत्तराखंड में आई भयानक बाढ़ के दौरान जिस वक्त लाखों लोग भूख प्यास से तड़प रहे थे उस वक्त अफसर सरकारी पैसे से रसगुल्ले और मटन खा रहे थे। घोटाले में त्रासदी से पहले राहत पहुंचने का बिल दिया गया है यानि 19 मई-25 मई का होटल बिल बनाया गया है जबकि उत्तराखंड त्रासदी 16 जून को आई थी।
RTI एक्टिविस्ट भूपेंद्र कुमार के द्वारा मांगी गई जानकारी के बाद खुलासा हुआ है कि त्रासदी के दौरान अधिकारियों ने 194 रुपए में आधा लीटर दूध खरीदा और रोजाना 7,000 रुपए के होटल पर खर्च किए। लगातार 3 दिन तक एक ही दुकान से 1800 रेन कोट खरीदे। साथ ही हेलीकॉप्टर इंधन पर 98 लाख के खर्च का दावा किया गया है।
यही नहीं, कुछ अफसरों ने 250 रुपए के नाश्ते, 300-350 रुपए प्रति दिन के खाने का बिल दिया है।
मामले पर उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि, " इस मामले की CBI जांच के लिए पत्र लिखूंगा और गवर्नर से मिलकर कांग्रेस के गोरखधंधे के बारे में बताऊंगा।"
रावत ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, ये कांग्रेस और आपदा मंत्री की मिलीभगत है।
उत्तराखंड के इनफॉर्मेशन कमिश्नर ने इस पर संज्ञान लेते हुए घोटाले की CBI जांच कराने का दिया सुझाव दिया है।
2013 में उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ में लगभग 5700 लोग मारे गए थे।