चंडीगढ़: इराक में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के चंगुल से निकलकर भागे पंजाब के एक युवक ने गुरुवार को दावा किया कि बंधक बनाए गए 39 भारतीयों की हत्या कर दी गई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में कहा कि उन्हें दावे पर विश्वास नहीं है, क्योंकि उनके अपने सूत्रों के मुताबिक आईएस द्वारा बंधक बनाए गए सभी भारतीय नागरिक जीवित हैं।
मोहाली में संवाददाताओं से हरजीत मसीह (25) ने कहा कि बंधक 39 भारतीयों को आईएस के आतंकवादियों ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया। इनमें से अधिकांश पंजाब के थे।
मसीह ने कहा, "आईएस के आतंकवादियों ने हमें अगवा कर लिया और एक दूसरे स्थान पर ले गए। अगवा किए गए लोगों में 40 भारतीय, जबकि 50 बांग्लादेशी नागरिक थे। उन्होंने हमें आश्वस्त किया था कि हमारे पासपोर्ट हमें मिल जाएंगे और हमें स्वदेश जाने की मंजूरी मिल जाएगी।"
उसने कहा, "उन्होंने (आईएस) हमें एक अन्य समूह (आतंकवादियों) को सौंप दिया, जो हमें किसी और जगह पर ले गए। बाद में वे हमें एक कमरे में ले गए और गोलीबारी शुरू कर दी। मेरे आसपास के सारे लोग मारे गए। मैं बच गया और बाद में भाग निकला।"
वहीं, नई दिल्ली में सुषमा स्वराज ने मसीह के दावे से असहमति जताते हुए कहा कि उनके सूत्रों ने भारतीय नागरिकों के मारे जाने का संकेत नहीं दिया है।
नई दिल्ली में गुरुवार को बंधक लोगों के परिजनों से मिलने के बाद सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं से कहा, "उन्हें ढूंढने में हम कोई कोताही नहीं बरत रहे। हम इस बात से आशान्वित हैं कि हम उन्हें ढूंढने में सक्षम होंगे और उन्हें वापस घर लाएंगे।"
सुषमा स्वराज ने कहा, "हरजीत मसीह को हमारी सरकार ने सुरक्षा दी थी, लेकिन वह खुद ही चला गया।"
इससे पहले मसीह के परिवार ने दावा किया था कि आईएस के चंगुल से निकलने और इराक से भागने के बाद उसे हिरासत में रखा गया है।
सुषमा ने कहा, "उसपर विश्वास करने का कोई कारण नहीं है। यदि हम उसपर विश्वास करें, तो इसका मतलब यही है कि हम तलाश को खत्म कर रहे हैं। मैं इस मामले में उम्मीद नहीं छोड़ना चाहती और हम सबूत की तलाश कर रहे हैं।"
उल्लेखनीय है कि बीते साल 11 जून को उत्तरी इराक के मोसूल से भारतीय नागरिकों को आईएस के आतंकवादियों ने अगवा कर लिया था।
बंदियों के परिजन अपने लोगों की जानकारी के लिए सुषमा स्वराज तथा नई दिल्ली तथा चंडीगढ़ में कई अन्य नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।