क्या है आरोप !
- आरोपों के मुताबिक मार्च 2010 से दिसंबर 2011 के दौरान जल बोर्ड ने किराए के टैंकर के लिए 5 बार टेंडर आमंत्रित किया।
- चार बार प्रक्रिया को अंतिम दौर में रद्द कर दिया गया।
- आखिर में दिसंबर 2011 में तीन कंपनियों को 385 टैंकर सप्लाई करने का ठेका दिया गया।
- लेकिन इन पौने दो साल में ठेका की रकम तीन गुना बढ़ गई।
इन कंपनियों को दिया गया था ठेका....
- सिटी लाइफ लाइन प्राइवेट लिमिटेड
- रैमकी इनवाइरो इंजिनियर्स लिमिटेड
- वीएसके टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड
डेढ साल में डील की रकम दुगुनी-तिगुनी हो गई
385 टैंकरों में तीन हजार लीटर क्षमता के 130 टैंकर और नौ हजार लीटर के 255 टैंकरों को सप्लाई करने का ठेका तीन कंपनियों को दस साल के लिए दे दिया गया। जुलाई 2010 में एक महीने के लिए तीन हजार लीटर और नौ हजार लीटर के एक टैंकर के लिए जो डील 42, 000 और 50,000 रुपये में हो रही थी उसे दिसम्बर 2011 में 98,000 और 1,30,000 रूपये में किया गया। यहां साफ पता चलता है कि डेढ साल में डील की रकम दुगुनी-तिगुनी हो गई। NGO सिटिजन फ्रंट फॉर वॉटर डेमोक्रेसी की शिकायत पर ये जांच बिठाई गई है।