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'चवन्नी का रुपया बना दिया...', अखिलेश यादव के बयान पर गरमाई यूपी की सियासत, RLD नेताओं ने कहा- 'जाट चुनाव में जवाब देंगे'

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Subhash Kumar
 Published : Aug 18, 2026 09:41 pm IST,  Updated : Aug 18, 2026 10:23 pm IST

अखिलेश यादव के 'चवन्नी का रुपया बना दिया' वाले बयान पर यूपी की सियासत गरमा गई है। RLD नेताओं ने कहा है कि जाट समाज के लोग अखिलेश को चुनाव में जवाब देंगे। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद के बारे में।

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अखिलेश यादव के बयान पर भड़की RLD Image Source : PTI

उत्तर प्रदेश में कुछ ही समय बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नेताओं की ओर से तीखी बयानबाजियों का दौर भी शुरू हो गया है। अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'चवन्नी को रुपया' बनाने के बयान को लेकर यूपी की सियासत गर्मा गई है। अखिलेश के इस बयान से आरएलडी के नेताओ में खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि जाट इस अपमान का जवाब समाजवादी पार्टी को 2027 के विधान सभा चुनाव में देंगे।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम में बयान दिया कि समाजवादी पार्टी ने गठबन्धन के साथियों को पूरा सम्मान दिया लेकिन इसके बावजूद कई साथी छोड़कर चले गए। अखिलेश ने कहा कि "बताओ हमलोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, तब भी छोड़कर चले गए।" अखिलेश  ने जयंत चौधरी का नाम तो नही लिया लेकिन उनके इस बयान को जयंत चौधरी से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि 2022 का विधान सभा चुनाव अखिलेश यादव और जयंत चौधरी मिलकर लड़े थे।

दरअसल, यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान जयंत के बीजेपी के साथ जाने पर अटकलें लगी थीं। लेकिन तब जयंत चौधरी ने कहा था कि "चवन्नी थोड़ी हूं कि पलट जाऊं।" गठबन्धन में अखिलेश ने आरएलडी को 33 सीट दी थी। आरएलडी के आठ उम्मीदवार विधायक भी बन गए थे। अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को राज्यसभा भी भेज दिया था। लेकिन ये दोस्ती ज्यादा दिन नही चल पाई। जयंत चौधरी 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के साथ चले गए और केंद्र में मंत्री बन गए। बता दें कि अखिलेश यादव ने चुनावी तैयारियां शुरू भी कर दी हैं। हाल ही में सपा ने अयोध्या सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। 

NDA के साथ चले गए थे जयंत

2024 लोकसभा चुनाव से पहले केन्‍द्र सरकार ने जयंत चौधरी के दादा और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को 'भारत रत्न' का सम्मान दिया था। इसके कुछ ही दिनों के बाद जयंत चौधरी की पार्टी ने विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया’ से अलग होकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का दामन थाम लिया था। एनडीए ने समझौते के तहत लोकसभा चुनाव में RLD को बागपत और बिजनौर की सीट दी थी। इन दोनों ही सीटों पर RLD के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।

यूपी में जाट वोटों का महत्व

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाटों के वोट काफी महत्व रखते हैं। यूपी में करीब ढाई फीसदी जाट वोट है। पश्चिमी यूपी में 22 जिलों में जाट करीब 14 फीसदी है और 40 से 50 सीट पर जाट वोट मायने रखता है।अब आरएलडी का कहना है कि मुलायम सिंह को राजनीति में लाने वाले चौधरी चरण सिंह थे और जाट इस अपमान पर अखिलेश को माफ नही करेंगे।

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