
मंदिर में बजरंग बली की बालरूप मूर्ति स्वयंभू है। इस मूर्ति के सीने के बाईं ओर एक बेहद सूक्ष्म छिद्र है, जिससे पवित्र जल की धारा निरंतर बहती रहती है। इस जल को भक्तजन चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बालाजी के मंदिर में प्रेतराज सरकार और कोतवाल कप्तान भैरव की मूर्तियां भी हैं।
मंदिर में बड़ी संख्या में ऊपरी बाधा से ग्रसित लोग अजीबोगरीब हरकत करते नजर आते हैं, जिसे यहां पेशी आना कहते हैं। मंदिर परिसर में दिन-रात बालाजी का जयकारा लगाते हुए इन लोगों का इलाज करते देखा जा सकता है।
यह पूरा दृश्य इतना हतप्रभ करने वाला होता है कि मानो किसी मुजरिम को थर्ड डिग्री दी जा रही हो और वह रहम की भीख मांग रहा हो। कई लोग पेशी आने पर बेहोश तक हो जाते हैं।
बुंदेलखण्ड से आए दीपक सोनी ने बताया कि वह यहां 25-30 वर्षो से आ रहे हैं। दीपक ने कहा, "कोई साल ऐसा नहीं गया, जब बाबा के चमत्कार का साक्षात अनुभव नहीं हुआ।"
इसी तरह अनूप मोदी कहते हैं, "परिवार और मित्रों से जुड़े कई मामले हैं जब दिल्ली की दवाई हार गई, लेकिन यहां आते ही चमत्कारिक रूप से लोग ठीक हो गए।"
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