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Video: वो अनोखा गांव जहां हिंदू-मुस्लिम संस्कृत में करते हैं बातें, जानिए

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 11, 2016 06:14 pm IST,  Updated : Jan 11, 2016 06:26 pm IST

पश्चिमी जगत ने कई बार यह माना है कि संस्कृत कंप्यूटर के लिए सबसे ज़्यादा अनुकूल भाषा है। अनेक पश्चिमी नागरिक संस्कृत भाषा सीखने भारत आते भी रहे हैं। दुख की बात है कि दुनिया

A village where Hindu Muslim speak in Sanskrit- India TV Hindi
A village where Hindu Muslim speak in Sanskrit

पश्चिमी जगत ने कई बार यह माना है कि संस्कृत कंप्यूटर के लिए सबसे ज़्यादा अनुकूल भाषा है। अनेक पश्चिमी नागरिक संस्कृत भाषा सीखने भारत आते भी रहे हैं। दुख की बात है कि दुनिया की सबसे पुरानी इस भाषा के सामने आज अपने ही देश में पहचान का संकट पैदा हो गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह तो सिर्फ हिंदुओं की भाषा है। ऐसे दौर में एक ऐसा गांव भी है, जहां रहने वाले हिंदू और मुसलमान भी आपस में संस्कृत में ही बातचीत करते हैं। इस गांव को संस्कृत विलेज भी कहा जाता है।

कर्नाटक के शिवामोग्गा शहर से आठ किलोमीटर की दूरी पर बसा है यह अनोखा गांव, जहां के रहने वाले लोग केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। इस गांव का नाम मुत्तुरु है और यह अपनी विशिष्ट पहचान को लेकर चर्चा में है। बताया जाता है कि तुंग नदी के किनारे बसे इस गांव में प्राचीन काल से ही संस्कृत बोली जा रही है और यहां के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को हर कीमत पर बरकार रखना चाहते हैं।

करीब 5000 की जनसंख्या वाले इस गांव में प्रवेश करते ही “भवत: नाम किम्?” (आपका नाम क्या है?) पूछा जाता है “हैलो” के स्थान पर “हरि ओम्” और “कैसे हो” के स्थान पर “कथा अस्ति?” आदि के द्वारा ही वार्तालाप होता है। बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं - सभी बहुत ही सहज रूप से संस्कृत में बातचीत करते हैं। यहां के लोग यह भी मानते हैं कि भाषा पर किसी धर्म या समाज का अधिकार नहीं होता, इसीलिए इस गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के लोग भी संस्कृत उतनी ही सहजता से बोलते हैं, जैसे कि अन्य लोग।

इस गांव की विशेषता ही यही है कि गांव की मातृभाषा संस्कृत मानी जाती है औऱ इस गांव में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा भी संस्कृत में ही होती है। ग्रामीणों को काम चाहे कोई भी हो, वे बोलते सिर्फ संस्कृत ही हैं। जैसे इस गांव के बच्चे क्रिकेट खेलते हुए और आपस में झगड़ते हैं, तो उनका झगड़ा भी संस्कृत भाषा के माध्यम से ही होता है। गांव में संस्कृत में बोधवाक्य लिखा नजर आता है। “मार्गे स्वच्छता विराजते। ग्रामे सुजना: विराजते।” अर्थात् सड़क पर स्वच्छता होने से यह पता चलता है कि गाँव में अच्छे लोग रहते हैं। कुछ घरों में लिखा रहता है कि आप यहां संस्कृत में बात कर कर सकते हैं।

 

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