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17 अगस्त तक नहीं भरा एन्यूमरेशन फॉर्म तो कट सकता है वोटर लिस्ट से नाम, 2002 के बाद दिल्ली आए लोगों के लिए भी निर्देश जारी

 Written By: Shakti Singh
 Published : Aug 06, 2026 08:54 am IST,  Updated : Aug 06, 2026 08:54 am IST

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सिर्फ दो तरह के लोगों का नाम ही वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा। पहले वो, जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म ही नहीं भरा और दूसरे वो, जो भारत के मतदाता नहीं हैं।

Voter list- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PTI

दिल्ली में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन की प्रक्रिया जारी है। इसके जरिए चुनाव आयोग मतदाता सूची में बदलाव करता है। मृत और पलायन कर चुके लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं। वहीं, नए वोटर भी आसानी से अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं। अगर किसी ने अपना शहर बदला है और उसका नाम दो जगहों में वोटर लिस्ट में शामिल है। ऐसे लोग भी इस दौरान किसी एक जगह से अपना नाम हटवा सकते हैं।

देश के कई राज्यों में हाल ही में यह प्रक्रिया पूरी हुई है और कई राज्यों में जारी है। दिल्ली में भी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया जारी है। इस बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि 2002 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर भी किसी को वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन और गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के बाद दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची 24 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी।

सिर्फ दो श्रेणी के लोग मतदाता सूची से बाहर होंगे

चुनाव आयोग की तरफ से साफ किया गया है कि सिर्फ उन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे, जिन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म ही नहीं भरा है। इसके अलावा सिर्फ उन्हीं लोगों के नाम काटे जाएंगे, जो देश के मतदाता नहीं हैं। जिन लोगों के नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं हैं, उन लोगों को नोचिस भेजा जाएगा। इसके बाद ऐसे लोग 2002 की मतदाता सूची में अपने माता-पिता या दादा-दादी, नाना-नानी के नाम का विवरण देकर दोबारा मतदाता बन सकते हैं।

दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने क्या बताया

दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के आधिकारिक एक्स हैंडल से लिखा गया, "एन्यूमरेशन फॉर्म बांटने और इकट्ठा करने के साथ दिल्ली भर में एन्यूमरेशन फेज जारी है। 5 अगस्त रात 8:00 बजे तक अधिकतर मदताओं का सत्यापन हो चुका है।" आयोग ने एक लिस्ट भी शेयर की, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पूरी जानकारी थी। दिल्ली सीईओ की तरफ से कहा गया कि यह लिस्ट कुल स्थिति, पारदर्शी, सबको साथ लेकर चलने वाली और बिना गलती वाली वोटर लिस्ट बनाने की चल रही कोशिशों को दिखाती है।

सोमनाथ भारती ने उठाए थे सवाल

आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने कहा था कि 1997 में आईआईटी से स्नातक करने और दिल्ली में कानून की पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिला। भारती ने इसको लेकर चिंता जताई थी कि दिल्ली में 20 से 30 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की अफवाहें हैं। सीईओ कार्यालय ने कहा कि यदि किसी मतदाता को पिछले एसआईआर में अपना नाम नहीं मिलता है तो वह अपने माता-पिता या दादा-दादी जैसे रिश्तेदारों का विवरण उपलब्ध करा सकता है।

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