
मैंडी लिखती है कि विमान का फर्स्ट क्लास असल में सभ्य वर्ग का नहीं रहा। यहां जो लोग यात्रा करते रहे हैं वो दरअसल कहीं से भी हाई क्लास नहीं दिखे।
मैंडी अपनी किताब में लिखती हैं कि उसे हमेशा एयरहोस्टेस की बजाय मनोरंजन के एक स्त्रोत की तरह समझा जाता था। कुछ लोग तो पैसे का लालच देकर भी बहलाने की कोशिश करते थे।
मैंडी ने लिखा है कि फर्स्ट क्लास में जब वो एक बार किसी व्यक्ति को ड्रिंक सर्व कर रही थी तो एक दूसरे पैसेंजर ने उसकी स्कर्ट में हाथ डाल दिया। मैंडी लिखती है कि रात को उड़ान भरने वाली अधिकतर फ्लाइट्स में फर्स्ट क्लास के नजारे कुछ अलग होते हैं। यहां लोग रात को रंगीन बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।