नई दिल्ली: ट्रांसपोर्टरों के शीर्ष संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC ) ने आज से पूरे देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है जिसकी वजह से सरकार के आश्वासन के बावजूद ट्रक चालक प्रस्तावित हड़ताल पर चले गये हैं।
ट्रक परिचालक मौजूदा टोल प्रणाली को खत्म करने और टैक्स के ‘एकमुश्त’ भुगतान समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं। AIMTC ने कहा है कि अनिवार्य सेवाओं को इस हड़ताल से अलग रखा जाएगा। वहीं ट्रांसपोर्टरों के एक अन्य संगठन आल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (AITWA) ने इस कार्रवाई से खुद को पूरी तरह अलग रखने की घोषणा की है।
AIMTC के अध्यक्ष भीम वाधवा ने कहा, ट्रकों की देशव्यापी हड़ताल के कारण सरकार को रोजाना करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
संगठन के अन्य पदाधिकारी भी हड़ताल को सफल बनाने के लिए दूसरे राज्यों में जा रहे हैं।
वाधवा ने साफ तौर पर कहा कि ट्रांसपोर्टरों का संगठन टोल के जरिये सरकार के राजस्व बढ़ाने के खिलाफ नहीं है लेकिन वह इसके संग्रह के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने की मांग कर रहा है, जिससे गैर-कानूनी संग्रह पर नकेल कसी जा सके और ईंधन में भी बचत हो।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि भ्रष्टाचार, शोषण और टोल बूथों एवं चेक नाकों पर फालतू समय की बरबादी के कारण कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। उनके मुताबिक टोल संग्रह को अप्रत्यक्ष टैक्स के तौर पर वसूला जाए और पुरे देश में आवागमन टोल मुक्त हो।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने AIMTC के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक में उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए दिसंबर तक देश भर में इलेक्ट्रॉनिक टोल प्रणाली का वादा किया, लेकिन टोल प्रणाली को पूरी तरह खत्म करने की संभावना को खारिज कर दी।
वाधवा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कारोबार पर टीडीएस प्रावधान को लेकन उनकी मांग पर वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सीबीडीटी चेयरमैन के साथ बैठक का आश्वासन दिया है।
इससे पहले गडकरी ने बुधवार को एआईएमटीसी से हड़ताल वापस लेने की अपील की और दिसंबर तक सभी 325 टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रानिक टोल संग्रहण प्रणाली का आश्वासन दिया।