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इलाहबाद HC का आदेश IAS अफसरों के बच्चें पढ़े सरकारी स्कूलों में

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 18, 2015 09:18 pm IST,  Updated : Aug 19, 2015 09:12 am IST

नई दिल्ली: इलाहबाद हाई कोर्ट का बड़ा फ़ैसला मुख्य सचिव को आदेश सभी नौकरशाहों और सरकारी कर्मचारियों के लिए उनके बच्चों को सरकारी प्रथमिक विद्यालयों में पढ़वाना अनिवार्य किया जाए। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि

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IAS, PCS अफसरों के बच्चें पढ़े सरकारी स्कूलों में: HC

नई दिल्ली: इलाहबाद हाई कोर्ट का बड़ा फ़ैसला मुख्य सचिव को आदेश सभी नौकरशाहों और सरकारी कर्मचारियों के लिए उनके बच्चों को सरकारी प्रथमिक विद्यालयों में पढ़वाना अनिवार्य किया जाए। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसी व्यवस्था की जाई कि अगले शिक्षासत्र से इसका अनुपालन सुनिश्चित हो सके। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन नौकरशाहों और सराकरी कर्मचारियों के बच्चें प्राइवेट स्कूलों में पढ़े उनके वतन में से फ़ीस की बराबर की कटौती करके उसे प्राथमिक विद्यालयों के विकास में लगाएं। आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की अध्यक्षता वीली खंडपीठ ने शिवकुमार पाठक और अन्य की याचिका पर दिया।

हाईकार्ट के मुताबिक, यदि सरकारी कर्मचारियों ने अपने बच्‍चों को कॉन्‍वेंट स्कूलों में पढ़ाया तो उन्‍हें फीस के बराबर की रकम हर महीने सरकारी खजाने में जमा करानी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों का इंक्रीमेंट और प्रमोशन कुछ वक्त के लिए रोकने की व्यवस्था की जाए।

यूपी के जूनियर और सीनियर स्कूलों में पढ़ाई की बुरी हालत के मद्देनजर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों, टॉप लेवल पर बैठे अधिकारियों और जजों के बच्चे सरकारी स्कूलों में अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ेंगे, तब तक इन स्कूलों की हालत नहीं सुधरेगी।

हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बच्चों को 2016 से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा दिलाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने आदेश मे कहा कि उत्तरप्रदेश के IAS, PCS और प्रशासनिक अधिकारी, जुलाई 2016 से अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूल के बजाए सरकारी विघालयों मे शिक्षा दिलाए। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को ये आदेश जारी किया गया और छह महीने में रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने ये आदेश सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर और बदहाल स्थितियों को देखते हुए  दिया है।

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