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मिडिल क्लास पर महंगाई की मार, दाल से लेकर स्वास्थ्य तक सब कुछ हुआ महंगा

 Written By: India TV News Desk
 Published : Oct 25, 2015 01:26 pm IST,  Updated : Oct 25, 2015 04:46 pm IST

नई दिल्ली: सरकारी आंकड़ों में बेशक महंगाई पिछले साल के मुकाबले कम हुई है। लेकिन, जरुरी सामान और सेवाएं महंगी हो गई हैं। एसोचैम के मुताबिक दाल, तैयार खाना, जलपान, कपड़ों के साथ-साथ शिक्षा और

महंगाई की मार: दाल से...- India TV Hindi
महंगाई की मार: दाल से सेहत की देखभाल तक सब महंगा

नई दिल्ली: सरकारी आंकड़ों में बेशक महंगाई पिछले साल के मुकाबले कम हुई है। लेकिन, जरुरी सामान और सेवाएं महंगी हो गई हैं। एसोचैम के मुताबिक दाल, तैयार खाना, जलपान, कपड़ों के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिडिल क्लास आदमी के पहुंच से बाहर हो रहा है।

दाल की महंगाई दर 30 फीसदी पहुंची-

एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक दालों के मामले में खुदरा मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई 30 फीसदी के आसपास पहुंच गई है। कुछ दालों के दाम 200 रुपए प्रति किलो पर बोले जा रहे हैं, जबकि कढ़ी बनाने में काम आने वाले कुछ मसालों की कीमतें 9.2 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं आम आदमी के पहुंच से बाहर

एसोचैम के महासचिव डी़एस रावत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में सालाना बढ़ोत्तरी बेशक तेजी से नहीं हो रही है। लेकिन इन सेवाओं का जो आधार मूल्य है वह इतना उंचा है कि बड़े और छोटे शहरों के मिडिल क्लास के लिए इनका लाभ उठाना पहुंच से बाहर है। दिल्ली में कुछ निजी अस्पताल तो ऐसे हैं जहां इलाज कराना आम आदमी के बस में नहीं है।

रावत ने कहा है कि केन्द्र और राज्य सरकारों को शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट काफी बढ़ाने की जरूरत है। डेंगू और स्वाइनफलू जैसी बीमारियों के फैलने पर सरकारी सेवाओं की पोल खुलकर सामने आ जाती है और सरकारी आवंटन कम रह हाता है।

आंकड़ों में घटी महंगाई

सितंबर 2015 में सीपीआई आधारित महंगाई 4.41 प्रतिशत रही है, जो कि एक साल पहले सितंबर में 6.46 प्रतिशत पर थी। हालांकि, थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई सितंबर में शून्य से -4.54 प्रतिशत नीचे रही। इससे पिछले महीने यह शून्य से 4.95 प्रतिशत नीचे थी।

एसोचैम के मुताबिक शिक्षा के मामले में सीपीआई महंगाई सितंबर में 6 प्रतिशत और स्वास्थ्य क्षेत्र में 5.4 प्रतिशत रही। इसमें कहा गया है, सार्वजनिक क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी तंगी के चलते मिडिल क्लास के लोगों को निजी स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ता है जिनकी लागत काफी ज्यादा है।

एसोचैम ने कहा कि अरहर, उड़द, मसूर दालों के दाम बढ़ने से मध्यमवर्ग की जेब पर बोझ बढ़ गया है। इसके साथ ही मांस, मछली, दूध और दूध से बने उत्पाद भी 5 से 5.5 प्रतिशत तक बढ़ गए।

आम आदमी की नहीं घटी ईएमआई

सकल मुद्रास्फीति दर में कमी से ब्याज दरें कुछ कम हुई हैं लेकिन कर्ज की समान मासिक किस्तों में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। रिजर्व बैंक ने हाल में ही ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। लेकिन, सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से दबाव बनाए जाने के बावजूद बैंकों ने अब तक सिर्फ 30 बेसिस प्वाइंट की कौटती की है। 

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