नयी दिल्ली: अपनी चौथी किताब और दूसरे उपन्यास में लेखक, उपन्यासकार भास्कर घोष ने जिस सफाई से भारत का खाका सामने रखने की कोशिश की है उससे पाठक हैरान रह जाएंगे। हाल में रिलीज हुये पैरिसाइड उपन्यास में गंदे, बदबूदार, सुस्त, भ्रष्ट और निर्धन देश के रूप में भारत की तस्वीर नहीं पेश की गयी है जैसा कि भारत पर लिखे औसतन हर उपन्यास में होता है।
घोष का किरदार आधुनिक भारत का है और वह दिल्ली महानगर का बाशिंदा है तथा वर्तमान के साथ कदम मिलाते हुए प्रगतिशील सोच रखता है। अपनी पहली किताब दूरदर्शन डेज में घोष ने दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक के तौर पर अपने अनुभवों को साझा किया था। आईएएस के अपने अनुभवों के बारे में उन्होंने एक और किताब द टेलर ऑफ टेल्स उपन्यास लिखा।
हार्पर कोलिंस द्वारा प्रकाशित नये उपन्यास में घोष ने बड़ी चतुराई से एक विग्यापन संदर्भ बिंदु का हवाला दिया है जिसमें नायक एक स्पर्धा में अभियान का हिस्सा बनता है जो ईयर ऑफ इंडिया विचार को बढ़ावा देता है।