नई दिल्ली: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को लेकर न्यायिक विवाद के बीच भाजपा के एक शीर्ष नेता ने सोमावार को संकेत दिया कि उनकी पार्टी के पास कांग्रेस के नौ अयोग्य बागियों से अधिक विधायकों का समर्थन है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि केवल नौ बागी विधायकों ने भाजपा को अपने समर्थन के बारे में खुल कर कहा है लेकिन सदन में शक्ति परीक्षण होने पर कांग्रेस के और भी विधायक उनकी ओर आ सकते हैं।
उत्तराखंड के मुद्दे पर भाजपा ने अभी चुप्पी साध रखी है क्योंकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने संबंधी मामले की सुनवाई फिलहाल उच्चतम न्यायालय कर रहा है जबकि नौ विधायकों की उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय में लंबित है। नाम जाहिर न करते हुए नेता ने बताया हमें बहुमत के लिए जितने विधायकों का समर्थन चाहिए उतने विधायकों ने तो खुल कर हमारा समर्थन किया है। लेकिन और विधायक भी हमारा समर्थन कर सकते हैं। अगर यह नौ विधायक अयोग्य ही रहते हैं तो भी भाजपा के पास विधायकों का पर्याप्त बहुमत है।
उत्तराखंड की 71 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के पास 27-27 विधायक हैं। इसके अलावा कांग्रेस के नौ बागी और भाजपा का एक बागी विधायक भी है। इनके अलावा तीन निर्दलीयों सहित छह विधायक और भी हैं जिन्होंने बर्खास्त की गई हरीश रावत सरकार को समर्थन दिया था। भाजपा का मानना है कि इनमें से कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं।
भाजपा नेता ने कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि उसकी सरकारों को अस्थिर करने के लिए दलबदल कराया जा रहा है जैसा कि अरूणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में देखा गया। उन्होंने कहा अपने विधायकों को अपने पाले में रखना कांग्रेस की जिम्मेदारी है न कि भाजपा की। अगर मध्यप्रदेश या गुजरात में हमारी पार्टी में विद्रोह होता है तो यह हमारी गलती होगी न कि कांग्रेस की। राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर भी भाजपा में भावनाएं उबाल पर हैं। उच्च न्यायालय ने रावत सरकार को बहाल कर दिया था और राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को ले कर केंद्र को फटकार लगाई थी।