नई दिल्ली: आप सरकार से अक्सर तनातनी की स्थिति रखने वाले दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त बीएस बस्सी को आज संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का सदस्य नियुक्त किया गया। इस संवैधानिक पद के लिए उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होगा।
सरकार ने 60 वर्षीय बस्सी के नाम को संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में मंजूरी दे दी । यह संस्था आईएएस, आईपीएस एवं अन्य अधिकारियों को चुनने के लिए सिविल सेवा परीक्षा लेती है। आयोग में अधिकतम 10 सदस्य होते हैं और एक अध्यक्ष होते हैं। 1977 बैच के अरूणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एवं केंद्र शासित प्रदेशों (एजीएमयूटी) कैडर के आईपीएस अधिकारी बस्सी इस वर्ष फरवरी में दिल्ली पुलिस प्रमुख के पद से सेवानिवृत हुए।
यूपीएससी के सदस्य के रूप में बस्सी का कार्यकाल पांच वर्षो का होगा और यह फरवरी 2021 तक होगा। संविधान के अनुसार, यूपीएससी के सदस्य का अधिकतम कार्यकाल छह वर्षो का हो सकता है जो 65 वर्ष की आयु तक हो सकता है। यूपीएससी में अध्यक्ष के अलावा अधिकतम 10 सदस्य हो सकते हैं।
बस्सी की नियुक्ति के साथ आयोग में सभी सदस्य नियुक्त हो गए हैं। यूपीएससी की अध्यक्षता दीपक गुप्ता कर रहे हैं जबकि इसके सदस्यों में अलका सिरोही, डेविड आर सेईमलिह, मनवीर सिंह, पूर्व नौसेना उप प्रमुख डी के दीवान, विनय मित्तल, छत्तर सिंह, प्रो. हेम चंद्र, अरविंद सक्सेना और प्रो. प्रदीप कुमार जोशी शामिल हैं।
AAP का आरोप, भाजपा ने बस्सी का अहसान चुकाया
आप ने आज कहा कि यूपीएससी सदस्य के तौर पर दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त बी एस बस्सी की नियुक्ति साबित करती है कि सरकार ने भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता का अहसान चुकाया है। आप नेता आशुतोष ने कहा, ‘नियुक्ति सरकार का विशेषाधिकार है। यह साफ हो गया है कि किसके इशारे पर मिस्टर बस्सी काम कर रहे थे और उनका एहसान चुकाया गया है।’
उन्होंने कहा, आप स्पष्ट तौर पर कहती रही है कि मिस्टर बस्सी भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे थे। इसलिए यूपीएससी सदस्य के तौर पर नियुक्ति तथ्य को साबित करती है कि वह भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता थे और हैं।