
‘भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिरता का स्वर्ग’
अशांत वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत को स्थायित्व की स्थली करार देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि सरकार ने भारत में उद्यम व व्यवसाय के लिए औपचारिक स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान की है, पुराने पड़ चुके कई कानूनों को निरस्त किए हैं और निवेश आकर्षित करने के लिए विरोध-भाव मुक्त कर प्रणाली स्थापित की है।
मोदी सरकार की उपलब्धियों की चर्चा
बजट सत्र के पहले दिन संसद के संयुक्त अधिवेशन में अपने अभिभाषण मे राष्ट्रपति ने मोदी की सरकार की उपलब्धियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत विश्वबैंक की कारोबार सुगमता की सूची में 12वें स्थान उपर आ गया है जबकि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई ।
सरकार ने संस्थाओं को सुधारने, प्रक्रियाओं को आसान बनाने और पुराने पड़ चुके कानून खत्म करने के कदम उठाए हैं। इसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास के अवसर पैदा करने, स्वच्छ उर्जा को बढावा देने तथा सब्सिडी में लीकेज कम करने पर ध्यादन दिया गया है। मुखर्जी ने कहा कि मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा कम हुआ है और 2015 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर रहा है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से फसलों की सिंचाई को बढावा मिलेगा
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से निश्चित रूप से फसलों की सिंचाई को बढावा मिलेगा और पानी की जरूरत आधारित उपयोग से सूखे का सामना किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, मेरी सरकार हर बूंद, अधिक फसल और जल सिंचन के लिए जल संचय के प्रति वचनबद्ध है।
जनधन में 21 करोड़ खाते खुले जिनमें 32,000 करोड़ रुपये जमा: राष्ट्रपति
प्रधानमंत्री जनधन योजना को दुनिया का सबसे सफलतम वित्तीय समावेश कार्यक्रम बताते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि योजना के तहत 21 करोड़ खाते खोले गये जिनमें 32,000 करोड़ रपये की राशि जमा है। संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति में सुधार लाने के लिए उठाये गये कदमों का उल्लेख किया।