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असैन्य परमाणु समझौते वायु प्रदूषण घटाने में सक्षम '

 Written By: IANS
 Published : May 09, 2015 08:49 am IST,  Updated : May 09, 2015 09:01 am IST

नई दिल्ली: देश के असैन्य परमाणु समझौते वायु प्रदूषण घटाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि 80 फीसदी बिजली उत्पादन कोयले से होता है, जिससे काफी प्रदूषण पैदा होता है और उससे निजात

polutionदेश के कुल बिजली उत्पादन में अभी परमाणु बिजली की हिस्सेदारी 3.5 फीसदी है और कुल खपत में इसकी हिस्सेदारी 1.3 फीसदी है। सरकार परमाणु बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता को 2014 के 4,780 मेगावाट से बढ़ाकर तीन गुना करना चाहती है। अभी स्थापित क्षमता 5,780 मेगावाट है। यही नहीं, 2031-32 तक सरकार इसे और बढ़ाकर 63,000 मेगावाट करना चाहती है।

खास बात यह है कि परमाणु बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में कार्बन डाईऑक्साइड तथा कई और प्रदूषणकारी तत्व पैदा नहीं होते हैं। यह हालांकि जोखिम भरा है। जर्मनी 2022 तक परमाणु संयंत्र बंद कर देना चाहता है।

बिजली उत्पादन के लिए कोयले का सबसे अधिक उपयोग करने वाला चीन भी परमाणु बिजली क्षमता को बढ़ाकर 2020 तक 58 हजार मेगावाट और 2030 तक 1,50,000 मेगावाट करना चाहता है।

परमाणु बिजली की राह में ईंधन आपूर्ति हालांकि बड़ी समस्या है, जो परमाणु बिजली के विस्तार को बाधित करता है।

देश की 5,780 मेगावाट परमाणु बिजली क्षमता में से 3,380 मेगावाट आयातित ईंधन पर आश्रित है। घरेलू परमाणु ईंधन से सिर्फ 2,400 मेगावाट के संयंत्रों को ही चलाया जा सकता है।

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