नई दिल्ली: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने के नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की। इससे पहले गुरुवार को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि राज्य में 18 मार्च से पहले की स्थिति बनी रहेगी। ऐसे में हरीश रावत एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। 29 अप्रैल को विधानसभा में उनका बहुमत परीक्षण होगा। हाईकोर्ट के फैसले के बाद गुरुवार शाम बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के घर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई।
सुप्रीम कोर्ट आज हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगाकर दूसरे पक्ष को नोटिस जारी कर सुनवाई की तारीख दे सकता है। सूत्रों के मुताबिक, यह सुनवाई सोमवार या बाद में हो सकती है। अभी तक नैनीताल हाईकोर्ट का लिखित आदेश नहीं आया है। सोमवार को आने की संभावना है। सूत्र बता रहे है कि हरीश रावत ने रात 9 बजे कैबिनेट बैठक बुलाकर कई अहम फैसले लिए हैं।
उच्च न्यायालय ने गुरुवार को हरीश रावत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया। एजी ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण आधारों का उल्लेख करते हुए कहा, उच्च न्यायालय का राष्ट्रपति की अधिसूचना को निरस्त करना गलत है। राष्ट्रपति की अधिसूचना उपयुक्त सामग्री पर आधारित है। उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करना शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत है।
रोहतगी ने कहा, 18 मार्च को पारित विनियोग विधेयक दरअसल पारित ही नहीं हुआ और उसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने इसे प्रमाणित कर दिया जिसका वास्तव में अर्थ हुआ कि सरकार गिर गई। विधानसभा अध्यक्ष के आदेश से अल्पमत सरकार को जारी रहने दिया गया।