
आचार्य का मानना था कि अधिकांश स्त्रियों में ऐसा स्वभाव पाया जाता है कि वो कई बार किसी काम को करने से पहले जरा भी नहीं सोचती हैं। वे अचानक ही कुछ भी काम कर बैठती हैं। इससे उनको ही नुकसान होता है। उनका मानना था कि बिना सोच-विचार के काम करना स्त्रियों के लिए आम होता हैं।
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