नई दिल्ली: जब पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने पडोसी पकिस्तान से अच्छे सम्बन्ध बनाने के विचार से फरवरी 1999 में बस द्वारा नई दिल्ली से लाहोर तक की एतिहासिक यात्रा की तो उन्हें इसका तनिक भी आभास नहीं था कि कारगिल युद्ध की नीवं उसी समय पड़ गई थी।
पकिस्तान का बदनाम जासूसी संघठन ISI जिसका रिश्ता वहां की फ़ौज के साथ जगजाहिर है यह कभी नहीं चाहता था कि भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध कायम हो! इसी वजह से इस बनते हुए रिश्ते को बिगड़ने के लिये ISI ने कारगिल युद्ध का षडयंत्र रचा।
कारगिल सेक्टर में LoC पर जब भयंकर बर्फबारी होती है तो अग्रिम सीमा चौकी पर तैनात दोनों देशों के फौजी निचले स्थानों पर चले आते है और जब बर्फ पिघलती है तो फिर से अपने स्थानों पर पहुँच कर मोर्चे संभाल लेते है।
लेकिन 1999 में इस बार ऐसा नहीं हुआ। ISI और फ़ौज ने मिलकर साजिस के तहत अपने फौजियों को मुजाहदीन के रूप में उन खाली चौकियों पर माकूल रसद और गोला बारूद के साथ तैनात कर दिया।
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