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Rajat Sharma's Blog | उत्तर प्रदेश: योगी आगे आगे, अखिलेश पीछे पीछे

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Aug 15, 2026 05:24 pm IST,  Updated : Aug 15, 2026 05:24 pm IST

Gen Z के सवाल पर योगी आदित्यनाथ को खास दिक्कत नहीं होगी क्योंकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई खास जनाधार नहीं है। राहुल गांधी ने प्रयागराज में जो शो किया था, उसका भी ज़मीन पर कोई खास असर दिखाई नहीं दिया।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

विभाजन विभीषिका दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन लाखों भारतीयों को याद किया जो 79 साल पहले देश विभाजन के समय  दंगों में मारे गये थे। योगी अपने मंत्रियों के साथ लखनऊ में एक मौन जुलूस में शामिल हुए। योगी ने कहा, बंटवारे के वक्त दंगों में हिन्दू और सिख कटते रहे और सत्ता के लालच में कांग्रेस के नेताओं ने जुबान नहीं खोली। योगी ने कहा, कांग्रेस का चरित्र अभी भी नहीं बदला है। योगी ने कहा, अगर यूपी में उनकी सरकार नहीं होती, तो CAA के नाम पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यूपी को दंगों की आग में झोंक देते। योगी ने कहा, अगर आजादी के वक्त नरेन्द्र मोदी जैसा कोई व्यक्ति देश का नेता होता, तो न विभाजन होता, न दंगे झेलने पड़ते।

योगी के सामने उत्तर प्रदेश का चुनाव है और वो दो ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं जिनसे उनका कोई सीधा संबंध नहीं हैं। पहली, राम मंदिर के दान पात्र में से चुराई गई राशि जिसे अखिलेश यादव पूरी शक्ति के साथ मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी, दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुआ Gen Z का आंदोलन, जिसे राहुल गांधी पूरी ताकत के साथ मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन दोनों का असर उत्तर प्रदेश के चुनाव पर पड़ सकता है। इसीलिए योगी ने जो कहा, वो इन दोनों मुद्दों को टारगेट करते हुए कहा।

राम मंदिर के मामले में योगी ने लोगों को याद दिलाया कि प्रभु राम और बजरंगबली की बात करने वाले समाजवादी पार्टी के लोग late arrival के दोषी हैं, वो तो बाबरी भक्त हैं। जहां तक राम मंदिर, सनातन धर्म, बजरंगबली का संबंध है, योगी इसमें अखिलेश से कई कदम आगे हैं। Gen Z के सवाल पर योगी आदित्यनाथ को खास दिक्कत नहीं होगी क्योंकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई खास जनाधार नहीं है। राहुल गांधी ने प्रयागराज में जो शो किया था, उसका भी ज़मीन पर कोई खास असर दिखाई नहीं दिया। सबसे बड़ी बात ये है कि योगी का उत्तर प्रदेश के नौजवानों के साथ एक personal connect है। कानून और व्यवस्था में सुधार के कारण और हिंदुत्व के protector होने के कारण इस मामले में भी योगी का advantage है।

राजनाथ सिंह को राहुल पर गुस्सा क्यों आया?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आम तौर पर कभी गुस्से में नजर नहीं आते, लेकिन शुक्रवार को वह गुस्से में नजर आए। वजह थी, राहुल गांधी ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मिमिक्री करते हुए मजाक उड़ाया और मंच पर संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री  मेलोनी का नाम लेकर भद्दा मजाक किया। इसकी आलोचना पूरे देश में हो रही है। राजनाथ सिंह ने कहा, राहुल गांधी ने अब हद पार कर दी है, वह देश के लोकतन्त्र के लिए खतरा बन गए हैं, जिस व्यक्ति के नाम के आगे गांधी लिखा हो, वह  इस तरह की ओछी हरकत करे, ये देख कर शर्म आती है, कांग्रेस के बड़े नेताओं को राहुल गांधी के दिमाग की जांच करानी चाहिए।

मैंने पहली बार राजनाथ सिंह को इतने गुस्से में देखा है। वह आम तौर पर किसी विवाद में नहीं फंसते, किसी विवादास्पद बात पर कमेंट नहीं करते। लेकिन उनकी बात सुनकर लगा कि राहुल गांधी के व्यवहार ने उन्हें बहुत आहत किया है। इसके दो कारण है। एक तो नेता विपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी का और विदेश नीति का जिस अंदाज में मजाक उड़ाया, उसने राजनाथ सिंह को परेशान किया। दूसरी वजह ये कि राजनाथ सिंह को लगता है कि जिस परिवार ने इतने साल देश पर राज किया, जिस परिवार में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे नेता रहे, उस परिवार का कोई सदस्य इस तरह की ओछी हरकत करे, तो दुख होना स्वाभाविक है।

राजनाथ सिंह का ये कहना बनता भी है क्योंकि उन्होंने स्वयं सार्वजनिक जीवन में हमेशा शालीनता का परिचय दिया है और कभी भी कोई ऐसा बयान नहीं दिया जो किसी को आहत करे। लेकिन राहुल गांधी पर इसका कोई असर होगा। इसकी उम्मीद कम ही है। वो पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुके हैं, कोर्ट में माफी मांगते हैं और फिर वही काम करने लगते हैं। कई बार संसद में भी शर्मींदगी झेल चुके हैं। कल ही स्पीकर ने राहुल गांधी के खिलाफ privilege motion स्वीकार कर लिया। अनुराग ठाकुर और संजय जायसवाल के नोटिस पर राहुल गांधी को 28 अगस्त तक जवाब देना है। अगर जवाब संतोषजनक न हुआ, तो  उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

मनन मिश्रा होते कौन हैं छात्रों पर रोक लगाने वाले?

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन मिश्रा को फटकारा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि बार काउंसिल को छात्रों और सुप्रीम कोर्ट के बीच के मामलों में टांग अड़ाने की जरूरत नहीं हैं। गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी स्टेट बार काउंसिलों को एक सर्कुलर जारी किया, इसमें निर्देश दिया गया कि हैदराबाद की नालसर यूनीवर्सिटी के 2026 बैच के किसी भी लॉ ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए। इस फैसले की जबरदस्त आलोचना हुई। बार काउंसिल अध्यक्ष को कुछ ही घंटों में अपना आदेश वापस लेना पड़ा।

मनन मिश्रा ने जो किया, वो गलत है, गैरकानूनी है, अनैतिक है, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील को इतनी समझ तो होनी चाहिए। उन्होंने Bar Council में अपनी position का बेजा इस्तेमाल किया। अच्छी बात ये है कि समय रहते उन्हें अक्ल आ गई और उन्होंने अपने फैसले को वापस लिया।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 14 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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