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स्वच्छ भारत अभियान का एक साल, मैसूर रहा टॉप तो दमोह सबसे गंदा

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 01, 2015 02:37 pm IST,  Updated : Oct 01, 2015 02:42 pm IST

नई दिल्ली: पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो स्वच्छ भारत अभ‍ियान शुरू किया था, उसका असर सिर्फ दक्ष‍िण भारत में देखने को मिला है। शर्मनाक बात तो यह है कि दिल्ली ही नहीं बल्क‍ि उत्तर

शीर्ष दस शहरों में मैसूर, तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु), नवी मुंबई, कोच्चि (केरल), हसन, मांडया और बेंगलूरु (कर्नाटक), तिरूअनंतपुरम, हलीसहर (पश्चिम बंगाल) और गंगटोक (सिक्किम) है।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को बेहतर ढंग से लागू करने वाले 476 शहरों की सूची जारी की है। इसमें कर्नाटक का मैसूर पहले और तमिलनाडु का तिरुचिरापल्ली दूसरे स्थान पर है। वहीं, दिल्ली शीर्ष 10 में भी जगह नहीं बना पाई, जबकि पटना 429वें और वाराणसी 418वें स्थान पर है।

मंत्रालय ने ‘2008 राष्ट्रीय स्वच्छता नीति’ के तहत 2014-15 में यह सर्वेक्षण कराया था। मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, एक लाख की आबादी वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के सभी 476 प्रथम श्रेणी के शहरों में स्वच्छता के सभी मापदंडों का सर्वेक्षण किया गया।

स्वच्छ भारत रैंकिंग के तहत शीर्ष 100 में दक्षिणी राज्यों के 39 शहरों, पूर्वी राज्यों के 27, पश्चिमी राज्यों के 15, उत्तरी राज्यों के 12 तथा पूर्वोत्तर राज्यों के सात शहर शामिल हैं।

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले 100 शहरों में उत्तरी राज्यों के 74, पूर्वी राज्यों के 21, पश्चिमी राज्यों के तीन और दक्षिणी राज्यों के दो शहर शामिल हैं। मध्य प्रदेश का दमोह सबसे नीचे 476 पर है। 476 शहरों की रैंकिंग में आगरा, इलाहाबाद, कानपुर को क्रमश : 145, 241 और 383वां स्थान प्राप्त हुआ है।

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