नई दिल्ली: पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था, उसका असर सिर्फ दक्षिण भारत में देखने को मिला है। शर्मनाक बात तो यह है कि दिल्ली ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ का एक भी शहर स्वच्छ भारत के टॉप 10 तक में नहीं पहुंचा।
देश में 476 शहरों के स्वच्छ भारत रैंकिंग में मैसूर शीर्ष पायदान पर है जबकि इस सूची के शीर्ष दस पायदानों में कर्नाटक के तीन अन्य शहरों का नाम शुमार है। वहीं, शहरी स्थानीय निकायों में राष्ट्रीय राजधानी के दिल्ली कैंटोनमेंट सूची में 15 वें स्थान पर और नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) 16 वें स्थान पर जबकि दिल्ली नगर निगम इस सूची में 398 वें स्थान पर है।
पश्चिम बंगाल ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और उसके 25 शहर शीर्ष 100 में स्थान बनाने में कामयाब रहे हैं। सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, यह रैंकिंग खुले में शौच और कचरों के प्रबंधन के तरीकों पर आधारित होते हैं।
इस सूची में पश्चिम बंगाल ने अच्छा स्थान पाया है जिसके 25 शहर शीर्ष 100 शहरों में शामिल हैं। कम से कम खुले में शौच और कचरों के प्रबंधन के तरीकों के कारण मैसूर शहर शीर्ष पायदान पर रहा।
सर्वेक्षण में दिल्ली सहित कुल 28 राजधानियों को शामिल किया गया था। नई दिल्ली (कुल रैंकिंग 16) इस सूची में चौथे पायदान पर है। इस सूची में सबसे अंतिम 28वें स्थान पर बिहार की राजधानी पटना है। लखनऊ 20वें, रांची 21वें और देहरादून 26वें स्थान पर है।
शीर्ष 100 में अपना स्थान बनाने वाले में 39 शहर दक्षिणी राज्यों, 27 शहर पूर्व से, 15 शहर पश्चिम से, 12 शहर उत्तर से और सात शहर उत्तर-पूर्वी राज्यों के हैं। 27 राजधानी शहरों में से 15 शहर शीर्ष 100 में शामिल हैं जबकि पांच शहर 300 के बाद अपना स्थान बना सके हैं।
राजधानियों की सूची में बेंगलूरू सातवें स्थान पर जबकि सबसे नीचे पटना 429 वें स्थान पर रहा। 100 नीचे के शहरों में 74 शहर उत्तर से, 21 पूर्व से तीन पश्चिम से और दो दक्षिण के शहर हैं।
अगली स्लाईड में शीर्ष दस शहरों के नाम..........