नई दिल्ली: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि अगर कोई शिक्षित और 18 की उम्र से बड़ी लड़की रिलेशनशिप में सहमति से संबंध बनाती है तो रिश्ते खराब होने के बाद वह रेप का आरोप नहीं लगा सकती है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि समाज में अभी भी शारीरिक संबंधों को लेकर वर्जनाएं हैं। लेकिन अगर महिला शारीरिक संबंधों को ना नहीं कहती है तो इसे सहमति का संबंध माना जाएगा। कोर्ट ने एक युवक की गिरफ्तारी पूर्व जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। जज मृदुला भटकर ने युवक की अर्जी स्वीकार कर ली।
कोर्ट ने एक युवक की गिरफ्तारी से पूर्व जमानत याचिका पर सुनवाई करते समय यह बात कही। उस याचिका के अनुसार, वह पिछले एक साल से 24 वर्षीय एक युवती के साथ रिलेशनशिप में था। इस दौरान उन दोनों बीच यौन संबंध भी बने। युवक ने युवती से शादी का वादा भी किया था। लेकिन साल के अंत में वह अपने वादे से मुकर गया और उन दोनों का रिलेशनशिप टूट गया।
लड़की ने आरोप लगाया कि युवक उसे शहर की कई होटलों में ले जाता। शादी का वादा कर उसके साथ जबरदस्ती संबंध बनाता। इस दौरान वह प्रेगनेंट भी हो गई लेकिन युवक ने अबॉर्शन करा दिया। उसने साथ ही कहा कि वह युवक की आर्थिक मदद भी करती थी। गिरफ्तारी के डर से युवक ने कोर्ट की शरण ली। लड़की की वकील ने जमानत का विरोध किया जिसे जज ने अस्वीकार कर दिया।
जज भटकर ने कहा,’ इसे रेप नहीं माना जा सकता। आप पढी-लिखी हैं और आपके पास ना कहने का अधिकार है। लेकिन आपने उस समय ना नहीं कहा तो अब इसे सहमति माना जाएगा। जब महिला शिक्षित और समझदार होती है तो वह ना कह सकती है।’ हालांकि जज ने युवक को लड़की के परिवार को फोन करने या धमकाने को लेकर चेताया है।