नई दिल्ली: रेलवे के जिस पेशे को अमिताभ बच्चन, गोविंदा और मिथुन चक्रवर्ती ने बड़े पर्दे पर बखूबी जिया अब रील लाइफ का वही रियल किरदार स्टेशनों से गायब हो सकता है। नहीं नहीं हम ऐसा नहीं कह रहे कि अब स्टेशनों से कुलियों को हटा दिया जाएगा। दरअसल रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने इस रेल बजट में कुलियों के सम्मान के लिए एक खास पहल की है। यानी अब कुलियों को कुली नहीं बल्कि सहायक कहा जाएगा। गौरतलब है कि सुरेश प्रभु ने आज रेल बजट पेश किया था।
प्रभु ने दी कुलियों को नई पहचान:
रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने बजट पेश किया है वहीं दूसरी ओर उन्होंने रेलवे स्टेशन पर लोगों के सामान को उठाने वाले कुलियों के लिए भी कुछ अहम फैसले लिए हैं। अब आपको रेलवे स्टेशन पर कोई कुली नहीं मिलेगा। सुरेश प्रभु ने उन्हें एक नई पहचान दी है। प्रभु का कहना है कि कुलियों को भी सम्मान की आवश्यकता होती है। अब आप रेलवे स्टेशन पर किसी को कुली कहकर नहीं बुला सकते हैं। सुरेश प्रभु ने ऐसा इसलिए किया है जिससे उनके उनके काम को सम्मान मिले। इसलिए सुरेश प्रभु ने कुलियों का नाम 'सहायक' रखा है। इसके साथ ही अब इन सहायकों को सामान सिर पर या कंधे पर नहीं ले जाना पड़ेगा। ये अब एयरपोर्ट पर मिलने वाली ट्रॉली के जरिए आपके सामान की ढुलाई नए अवतार में करेंगे। इसके साथ ही प्रभु ने उनकी ड्रेस को भी बदलने का सोचा है यानि अब आपको रेलवे स्टेशन पर कोई लाल वर्दी में नहीं दिखेगा। इस वर्दी को बदलकर अब नीला कर दिया गया है।
रेल बजट का नाम सुनते ही सबसे पहले जो बात जहन में कौंधती है वो ये होती है कि आम आदमी को क्या मिला। अगर रेलवे की बात की जाए तो सबसे आम आदमी कुली ही होता है। इसी आम आदमी का प्रभु ने इस बार ख्याल रखा है। गुरुवार को रेल बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट लोगों की उम्मीदों को पूरा करने वाला होगा। रेलवे को बेहतर बनाने की उनकी कोशिश है। उन्होंने कहा कि रेलवे में इस साल निवेश पिछले साल से दोगुना होगा। वहीं अगले साल 1,84,820 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाएंगे। रेल बजट में 10% आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सबसे बड़ी बात उन्होंने यह कहा कि 2020 तक गाड़ियों के टाईम पर चलने की गारंटी होगी। इसी दौरान मानव रहित क्रॉसिंग खत्म हो जाएंगी। इसके अलावा 2020 तक सभी ट्रेनों में बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे।