नई दिल्ली| ऐसे समय जब भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है, भारत सरकार गरीबों, दिहाड़ी मजदूर और संगठित क्षेत्र के लोगों के मदद के लिये बहुत कुछ कर रही है। ऐसे में कई लोग दिल खोलकर प्रधानमंत्री की राहत कोष में दान कर रहे हैं। इस बाबत दिल्ली की लेन्सर स्कूल की 12 वी की छात्रा संस्कृति यादव सबके लिये आदर्श बन कर उभरी है। संस्कृति ने अपने पर्सनल सेविंग से प्रधानमंत्री के राहत कोष में ढाई लाख रुपये का दान दिया है। संस्कृति का कहना है वह प्रधानमंत्री मोदी के कोरोनावायरस से लोगों को बचाने के लिये किये जा रहे काम से प्रभावित हैं, लिहाजा वो भी इस महान काम मे अपना योगदान दे रही है। संस्कृति ने इस रकम का दान प्रधानमंत्री राहत कोष में डिजिटली ट्रांसफर कर किया है।
मानव संसाधन मंत्री ने दिया एक माह का वेतन
केंद्रीय मानव संसाधान विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने देश में कोरोनावायरस के प्रकोप से लड़ने के लिए स्थापित प्रधामंत्री राहत कोष में अपना एक महीने का वेतन दान करने की घोषणा की है। निशंक ने कहा, "कोरोना वायरस के इस वैश्विक संकट के दौर में इस महामारी से लड़ने के लिए आर्थिक सहयोग के रूप में महीने का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर रहा हूं। जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत स्तर पर आगे और भी यथासंभव सहयोग की कोशिश करूंगा।"
उन्होंने सभी देशवासियों से इस संकट की घड़ी में एकजुट रहने और प्रधानमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग की अपील को मानने का निवेदन भी किया। उन्होंने कहा, "मैं सभी देशवासियों से हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि वे प्रधानमंत्री जी कीअपील को मानते हुए अपने अपने घरों में रहकर इस महामारी के खिलाफ जंग मेंअपना सहयोग दें। इसके अलावा जो भी व्यक्ति इस वायरस के खिलाफ लड़ाई आर्थिक सहयोग देना चाहता हो वो भी प्रधानमंत्री राहत कोष में धनराशि जमा करवा सकते हैं।"
भारत में इस महामारी के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आज ही राहत पैकेज भी घोषणा की है। मंत्री ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से भी अपील की है कि वो इस खतरनाक महामारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक करें और उनको लॉकडाउन का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करें। वहीं सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने छात्रों अभिभावकों और शिक्षकों को लॉकडाउन के इस समय का सदुपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "लॉकडाउन का यह समय बच्चों, अध्यापकों अभिभावकों तीनों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आया है। सबके पास असीमित समय, घर जैसी की प्रयोगशाला, इंटरनेट पर मौजूद दुनिया के सारे संसाधन चुटकियों में उपलब्ध हैं।"