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'एस्ट्रसैट' ले जाने वाले रॉकेट का प्रक्षेपण

 Written By: IANS
 Published : Sep 28, 2015 07:43 am IST,  Updated : Sep 28, 2015 10:44 am IST

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): 'एस्ट्रसैट' और छह विदेशी उपग्रहों को लेकर जाने वाले रॉकेट का यहां सोमवार को प्रक्षेपण किया गया। रॉकेट का प्रक्षेपण सुबह ठीक 10 बजे किया गया। 44.4 मीटर लंबा और 320 टन

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'एस्ट्रसैट' ले जाने वाले रॉकेट का प्रक्षेपण

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): 'एस्ट्रसैट' और छह विदेशी उपग्रहों को लेकर जाने वाले रॉकेट का यहां सोमवार को प्रक्षेपण किया गया।

रॉकेट का प्रक्षेपण सुबह ठीक 10 बजे किया गया। 44.4 मीटर लंबा और 320 टन वजनी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) यहां रॉकेट पोर्ट पर लांच पैड से अलग हुआ।

'एस्ट्रसैट' देश का पहला बहु-तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह है, जो ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा।

एस्ट्रोसैट को पृथ्वी से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

28 सितंबर को रॉकेट के साथ छोड़े गये उपग्रहों में देश का पहला बहु-तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह 'एस्ट्रोसैट' भी शामिल है, जो ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा।

सोमवार को छह विदेशी उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में 50 वर्ष पूरा कर लेगा।

भारत अब तक शुल्क लेकर 45 विदेशी उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर चुका है।

इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी के प्रक्षेपण के लिए शनिवार की सुबह आठ बजे उल्टी गिनती शुरू की गई।

सात उपग्रहों को ले जाने वाला यह रॉकेट सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण स्थल से सुबह 10.0 बजे उड़ान भरेगा।

इसरो ने 2010 में एक साथ 10 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया था, जिसमें भारत के दो काटरेसैट-2ए उपग्रह भी शामिल थे।

सोमवार को भारत तीसरी बार एक साथ सात उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा।

इसरो की मिशन रेडीनेस कमिटी और लांच ऑथोराइजेशन बोर्ड ने गुरुवार को 50 घंटे पूर्व उल्टी गिनती शुरू किए जाने को मंजूरी दे दी थी।

सात उपग्रहों को ले जाने वाला यह चार स्तरीय पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट 44.4 मीटर लंबा और 320 टन वजनी है।

उल्टी गिनती के दौरान ईंधन भरे जाने के अलावा सारे सिस्टम की जांच और पुनर्जाच की जाएगी।

रॉकेट के साथ लांच किए जाने वाले सातों उपग्रहों का कुल वजन 1,631 किलोग्राम है।

उड़ान भरने के 22 मिनट बाद रॉकेट धरती की सतह से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर एस्ट्रोसैट को उसकी कक्षा में स्थापित कर देगा।

इसके कुछ ही मिनट के अंतराल पर शेष छह उपग्रह भी अपनी-अपनी कक्षा में स्थापित कर दिए जाएंगे। इस अभियान में कुल 25 मिनट का समय लगेगा।

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