नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज केन्द्र और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से पूछा कि सिविल सेवा की शुरुआती परीक्षा में आवेदन फार्म में तीसरे लिंग के विकल्प को शामिल क्यों नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति पीएस तेजी की पीठ ने यूपीएससी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से पूछा कि जब उच्चतम न्यायालय ने ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग के रूप में घोषित किया है तो इस श्रेणी को परीक्षा के योग्यता मानदंड में शामिल क्यों नहीं किया गया।
अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण निदेशालय को नोटिस जारी करते हुए पूछा, उच्चतम न्यायालय के 15 अप्रैल 2014 के फैसले के बावजूद, आप ऐसा कर रहे हैं। क्यों? क्या आप उन्हें (ट्रांसजेंडर) सीधे अयोग्य ठहराना चाहते हैं?
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 जून की तारीख तय की क्योंकि परीक्षा के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 19 जून है।
अदालत ने परीक्षा के लिए संघ लोक सेवा आयोग की नोटिस के लिंग योग्यता मानदंड संबंधी अंश को निरस्त करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।