नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) को कथित रूप से बदनाम करने के इरादे से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भारतीय जनता पार्टी के निलंबित सांसद कीर्ति आजाद की आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ क्रिकेट संस्था और इसके उपाध्यक्ष चेतन चौहान की ओर से दर्ज आपराधिक मानहानि संबंधी मामले में सुनवाई के लिए आज 10 मार्च की तारीख तय की।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा के छुट्टी पर होने के कारण मामले की सुनवाई अगली तारीख तक के लिए टाल दी गई। अदालत ने इससे पहले मामले पर विचार और दलीलों के लिए आज की तारीख दी थी। चौहान भी अदालत में मौजूद थे और साथ में कार्यवाही के लिए उनके वकील भी थे। याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि केजरीवाल और स्वयं डीडीसीए के सदस्य आजाद ने महज लोगों की नजरों में आने और राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए उसे बदनाम करने वाले बयान दिए।
इसके अनुसार, आरोपियों की उपरोक्त टिप्पणियों से हजारों क्रिकेट प्रेमियों, भारतीय नागरिकों और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकायतकर्ता (DDCA) की साख और प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचा है। वकील संग्राम पटनायक की ओर से दर्ज याचिका के मुताबिक, यह हमेशा से एक गंभीर आशंका रही है जो इस मामले में सही साबित हो रही है, जिसमें भड़काऊ बयान, उनकी असत्यता की जांच किए बिना उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पहुंचाया गया और फिर इन्हें बार बार प्रकाशित और प्रसारित किया गया जिससे कि स्थिति बहुत पेचीदा हो गई है।
याचिका में यह आरोप लगाया गया कि केजरीवाल ने राष्ट्रीय चैनल पर डीडीसीए के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की जिसके कारण क्रिकेट संस्था और चौहान को सार्वजनिक तौर पर अपूरणीय क्षति हुई। इसमें दावा किया गया कि केजरीवाल के गलत बयानों का आजाद ने तुरंत समर्थन किया। इसमें केजरीवाल के एक चैनल को दिए इंटरव्यू का हवाला दिया गया जिसमें उन्होंने (केजरीवाल) कथित तौर पर यह कहा था कि डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं के अलावा देह व्यापार जैसे अन्य गलत काम भी किए जा रहे हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया, चूंकि आरोपियों ने सार्वजनिक हस्ती होते हुए यह जानकर भी कि उनके गलत आरोपों के कारण शिकायतकर्ता को भारी नुकसान और उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है, उन्होंने मीडिया जैसे मंच को चुना। इसमें आरोप लगाया गया, यह स्पष्ट है कि आरोपियों ने अपनी पसंद के मुताबिक समय का चुनाव किया और शिकायतकर्ता को नुकसान पहुंचाने, नीचा दिखाने, क्षति पहुंचाने और साख को संकट में डालने तथा लोगों की नजरों में उनकी प्रतिष्ठा कम करने के इरादों से किए गए उनके गलत बयानों के कारणों का अभी तक पूरी तरह से खुलासा नहीं हुआ है।
याचिका में केजरीवाल और कीर्ति आजाद की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया गया है और यह कहा गया कि उन्होंने कथित तौर पर क्रिकेट संस्था के खिलाफ पूरी तरह बेबुनियाद, गलत, निराधार और बेहद आपत्तिजनक बयान दिए।