अहमदाबाद: गुजरात उच्च न्यायालय ने पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ सूरत में दाखिल देशद्रोह के एक मामले में उनकी जमानत अर्जी पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। हार्दिक ने उन्हें दो सप्ताह पहले जमानत देने से इनकार करने के सूरत सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी है।
सूरत पुलिस की अपराध शाखा ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया था कि हार्दिक को यदि छोड़ दिया गया तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। न्यायमूर्ति ए जे देसाई ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई सात अप्रैल तक स्थगित कर दी।
हार्दिक पिछले साल सितंबर से सूरत की लाजपुर जेल में बंद हैं। उन पर अहमदाबाद में एक और देशद्रोह का मामला चल रहा है। दोनों ही मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं।
22 साल के पटेल नेता ने पिछले साल तीन अक्तूबर को कथित तौर पर सूरत के अपने समुदाय के एक कार्यकर्ता को सलाह दी थी कि अपनी जान देने के बजाय पुलिसकर्मियों को मारे।
हार्दिक ने कथित तौर पर विपुल देसाई नामक कार्यकर्ता से कहा था, अगर तुम्हारे अंदर इतना साहस है तो जाओ और कुछ पुलिसकर्मियों को मारो। पटेल कभी आत्महत्या नहीं करते। इससे पहले विपुल ने घोषणा की थी कि वह आरक्षण आंदोलन के समर्थन में आत्महत्या कर लेगा। इसके बाद सूरत पुलिस की अपराध शाखा ने हार्दिक के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया था और उसे गिरफ्तार कर लिया था।