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दलित छात्र खुदकुशी मामला: राहुल गांधी जाएंगे हैदराबाद

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 19, 2016 10:25 am IST,  Updated : Jan 19, 2016 10:25 am IST

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित स्टूडेंट की खुदकुशी पर हैदराबाद में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। खुदकुशी मामले में केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के घिरने से सियासत गर्माती दिख रही है।

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नई दिल्ली: हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित स्टूडेंट की खुदकुशी पर हैदराबाद में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। खुदकुशी मामले में केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के घिरने से सियासत गर्माती दिख रही है। इस मामले पर हैदराबाद से लेकर दिल्ली तक मचे बवाल के बाद आज कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी हैदराबाद यूनिवर्सिटी का दौरा कर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात करेंगे। उनके साथ कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी रहेंगे।

मंगलवार सुबह तेलंगाना जागृति युवा मोर्चा ने हैदराबाद में दत्तात्रेय के घर के बाहर प्रदर्शन किया। बवाल शुरू होने के बाद केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और विश्वविद्यालय के वीसी अप्पा राव के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। घटना से नाराज छात्रों ने दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सामने विरोध-प्रदर्शन किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एचआरडी मंत्रालय ने मामले की पड़ताल के लिए दो सदस्यीय तथ्यान्वेषी दल का गठन किया है। साइबराबाद पुलिस आयुक्त सीवी आनंद के मुताबिक, परिसर में अभी स्थिति ‘ठीक’ है। बीती रात को छात्रों ने एकजुट होकर रोहित के शव के साथ प्रदर्शन किया और नारे लगाए, जिसके कारण परिसर में हल्का तनाव बना रहा।

मालूम हो कि दलित पीएचडी स्कॉलर वी. रोहित केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रावास में फांसी पर लटके मिले थे।  रोहित उन पांच शोध छात्रों में शामिल थे जिन्हें हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (एचसीयू) ने पिछले वर्ष अगस्त में निलंबित किया था और वह एक छात्र नेता पर हमले के आरोपियों में शामिल थे।

इन पांचों छात्रों को पिछले साल अगस्त में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं से झड़प के बाद निलंबित कर दिया गया था। यह मामला दिल्ली विश्वविद्यालय में 'मुजफ्फरनगर बाकी है' वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग पर एबीवीपी के हमले के बाद शुरू हुआ। एएसए ने एबीवीपी के इस कदम की निंदा करते हुए इसके विरोध में परिसर में प्रदर्शन किया था। इन शोधार्थियों को उनके छात्रावास से दिसंबर में निष्कासित कर दिया गया था। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में स्थित छात्रावासों और अन्य इमारतों में जाने से रोक दिया गया था। उन्हें सिर्फ अपने विषय से संबंधित कक्षा, पुस्तकालय, सम्मेलनों और कार्यशालाओं में जाने की अनुमति थी। उन्हें उनके कमरों से जनवरी में निकाल दिया गया था, जिसके बाद वे विश्वविद्यालय परिसर में ही बने शिविर में सोने के लिए मजबूर थे।

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