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भोजपुरी, राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देने की मांग

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 05, 2016 02:00 pm IST,  Updated : Apr 05, 2016 02:00 pm IST

UNESCO ने देशज बोलियों और भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए सरकार से भोजपुरी, राजस्थानी समेत कई भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है जो काफी समय से विचाराधीन हैं।

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नई दिल्ली: यूनेस्को की देश की अनेक बोलियों के विलुप्त होने के खतरे की सूची में शामिल होने की रिपोर्ट को रेखांकित करते हुए सांसदों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने देशज बोलियों और भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए सरकार से भोजपुरी, राजस्थानी समेत कई भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है जो काफी समय से विचाराधीन हैं।

इनका कहना है कि ऐसे समय में जब देशकाल और माहौल में काफी बदलाव आ रहा है, ऐसे में देशज बोलियों और भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन की काफी जरूरत है। ऐसे समय में भोजपुरी, राजस्थानी समेत कई भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए।

मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए भाजपा सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भोजपुरी एवं राजस्थानी के साथ साथ भोंटी भाषा को आठवीं अनुसूची में मान्यता देने के मुद्दे को गृहमंत्री एवं प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया है।

उन्होंने कहा, मुझो पूरी उम्मीद है कि तकनीकी अडचनों को जल्द ही दूर करके इन तीनों अन्तराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त भाषाओं को अनुसूची में जगह दे दी जाएगी । उन्होंने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार आई थी उस दौरान भी वर्षो से लम्बित कुछ भाषाओं को मान्यता दी गयी थी।

आम आदमी पार्टी के द्वारका से विधायक आदर्श शास्त्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्तर पर भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने संबंधी प्रस्ताव को विधानसभा में पारित करके केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

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