लखनऊ: मलमास या पुरुषोत्तम मास तीन साल के बाद बनने वाली तिथियों के योग से बनता है। इसे अधिमास भी कहा जाता है। इस वर्ष 17 जून से 16 जुलाई तक अधिक मास के योग बन रहे हैं। वर्ष 2015 का यह मलमास कई मामलों में बेहद अहम है, क्योंकि यह योग 19 साल बाद बन रहा है। मलमास में मांगलिक कार्य तो वर्जित रहते हैं, लेकिन भगवान की आराधना, जप-तप, तीर्थ यात्रा करने से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। इस मास में भगवान शिव की अराधना बेहद फलदायी होती है।
विद्वानों के अनुसार, हर तीसरे वर्ष में अधिक मास होता है। सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश को संक्रांति होना कहा जाता है। सौर मास 12 और राशियां भी 12 होती हैं। जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती, तब अधिक मास होता है। यह स्थिति 32 माह 16 दिन में एक यानि हर तीसरे वर्ष बनती है।
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