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19 वर्ष के बाद बन रहा है यह योग, जानिए क्या

 Written By: IANS
 Published : Jun 22, 2015 02:51 pm IST,  Updated : Jun 22, 2015 03:03 pm IST

लखनऊ: मलमास या पुरुषोत्तम मास तीन साल के बाद बनने वाली तिथियों के योग से बनता है। इसे अधिमास भी कहा जाता है। इस वर्ष 17 जून से 16 जुलाई तक अधिक मास के योग

इस वर्ष 17 जून से 16 जुलाई तक का समय मलमास का रहेगा। इस माह में जप, तप, तीर्थ यात्रा, कथा श्रवण का बड़ा महत्व है। अधिक मास में प्रतिदिन भागवत कथा का श्रवण करने से अभय फल की प्राप्ति होती है। मलमास को भगवान विष्णु की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

आषाढ़ मास में मलमास लगने का संयोग दशकों बाद बनता है। इससे पूर्व 1996 में यह संयोग बना था तथा अगली बार 2035 में यह संयोग बनेगा।

डॉ. शिवकुमार शुक्ल के मुताबिक, जुलाई से दिसंबर तक पड़ने वाले त्योहार मौजूदा साल की तिथियों के मुकाबले दस से 20 दिन तक की देरी से आएंगे। यह स्थिति अधिक मास के कारण बनेगी।

उन्होंने बताया कि 2012 में अधिक मास होने के कारण दो भाद्रपद थे और 2015 में दो आषाढ़ होंगे, जबकि 2018 में 16 मई से 13 जून तक दो ज्येष्ठ होंगे। अधिमास में किए जाने वाले पूजन यज्ञ से मिलने वाले फल की चर्चा करते हुए डॉ. शुक्ल ने बताया कि इस मास में भगवान विष्णु का पूजन, हवन, जप-तप एवं दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।

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