खास तौर पर भगवान कृष्ण, श्रीमद् भागवत गीता, श्रीराम की अराधना, कथा वाचन एवं विष्णु की उपासना की जाती है। इस मास में एक समय भोजन करना, भूमि पर सोने से भी लाभ प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में तीर्थ स्थलों एवं धार्मिक स्थानों पर जाकर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
डॉ. शुक्ल के मुताबिक, अधिमास में आने वाली शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की एकादशी पद्मिनी एवं परमा एकादशी कहलाती है, जो इष्ट फलदायिनी, वैभव एवं कीर्ति में वृद्धि करती है। अधिक मास में शादी, विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवित जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।