
फैशन डिजायनर का 84 घंटे वाला ड्रामा
अभी तक शिप्रा की हर चाल उसके हिसाब से आगे बढ़ रही थी। बस में सवार शिप्रा पहले नोएडा से धौला कुंआ पहुंची और फिर धौला कुंआ से उसने राजस्थान जाने के लिए बस पकड़ी। उसकी मंजिल थी जयपुर के पास बना एक आश्रम।
एक तरफ नोएडा से शिप्रा राजस्थान पहुंच गई, दूसरी तरफ हैरान परेशान घरवालों ने पुलिस का दरवाजा खटखटया। मामला एक महिला की गुमशुदगी से जुड़ा था लिहाजा नोएडा पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी, पांच से ज्यादा टीमें बनाई गई, नोएडा से दिल्ली के हर रूट के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया। घरवालों के साथ-साथ शिप्रा को जानने वालों से पूछताछ की गई और तो और खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केस को जल्द से जल्द सुलझाने का दवाब पुलिस पर बनाया। यही वजह है कि नोएडा पुलिस ने जांच का दायरा पूरी तरह बढ़ा दिया। चौंकाने वाली बात ये थी कि गुजरते वक्त के साथ पुलिस मामले को सुलझाने की बजाय और उलझती जा रही थी, इसी दौरान एक फोन से पुलिस को पहला ब्रेक थ्रू मिला।
84 घंटे के बाद शिप्रा ने पति को फोन किया और जानकारी दी कि वो इस वक्त गुडगांव में है, बस फिर क्या था पति चेतन ने नोएडा पुलिस को इसकी जानकारी दी और शिप्रा को गुड़गांव से बरामद कर लिया गया। शिप्रा ने पूछताछ के दौरान बताया है कि वो किसी कीमत पर घर नहीं लौटना चाहती थी, लेकिन उसे अपनी एक कमजोरी के चलते ऐसा फैसला करना पड़ा, वो कमजोरी थी शिप्रा का 18 महीने का बेटा। पुलिस के मुताबिक न्यूज चैनल पर खबर देखने के बाद उसने वापस लौटने का फैसला किया, गुरूवार को ही वो बस से गुड़गांव पहुंची थी, और वही से घरवालों को फोन किया था जिसके बाद 84 घंटे का किडनैपिंग ड्रामा खत्म हो गया।